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इंदौर: 9 करोड़ के इंजेक्शन से बच सकती है मासूम की जिंदगी, 3 दिन में जुटाए 4 लाख

DR Times
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इंदौर: शहर में एक मासूम बच्ची की जिंदगी एक अनोखी पहल के जरिए बचाई जा रही है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) नामक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही इस बच्ची के लिए 9 करोड़ रुपये का इंजेक्शन लेने की जरूरत है। हालाँकि, तीन दिन में ही 4 लाख रुपये जुटा लिए गए हैं, और अब प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और आम लोगों से मदद की अपील की जा रही है।

इस मुहिम की शुरुआत ‘आर्ट ऑफ क्रिएशन’ ग्रुप ने की, जो कस्तूरबा गांधी महिला कल्याण केंद्र के सहयोग से काम कर रहा है। ग्रुप की टीम ने स्थानीय नागरिकों को जागरूक किया और सोशल मीडिया पर भी मदद के लिए अपील की। इंदौरवासियों का सहयोग देखते ही बन रहा है। शहर के कई लोग, व्यापारी और सामाजिक संगठन भी इस नेक काम में आगे आए हैं।

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें मांसपेशियों की कमजोरी धीरे-धीरे बढ़ती है और बच्चा चलने-फिरने और सामान्य गतिविधियों में सक्षम नहीं रह पाता। विशेषज्ञों का कहना है कि इस 9 करोड़ रुपये के इंजेक्शन से बच्ची की जीवन-रक्षा संभव है और उसके स्वास्थ्य में सुधार आने की संभावना है।

‘आर्ट ऑफ क्रिएशन’ के संयोजक ने बताया कि तीन दिन के भीतर ही 4 लाख रुपये जुटाए जा चुके हैं। यह पहल इस बात का सबूत है कि समाज के लोग जरूरतमंदों के लिए कितने संवेदनशील और मददगार हैं। उन्होंने कहा कि अभी भी काफी राशि की आवश्यकता है, इसलिए सभी से अपील है कि वे इस नेक कार्य में योगदान दें।

इस पहल में शासन भी आगे आया है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने बच्ची के इलाज के लिए जरूरी प्रक्रियाओं को तेज करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा प्रशासन ने जनसंपर्क माध्यमों के जरिए भी लोगों से मदद की अपील शुरू की है।

इस पहल का उद्देश्य सिर्फ धन जुटाना नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करना भी है। समाज में ऐसे दुर्लभ रोगों से जूझ रहे बच्चों के लिए समय पर मदद मिलना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शुरुआती चरण में उपचार शुरू किया जाए तो SMA जैसी गंभीर बीमारियों में सुधार के अच्छे मौके होते हैं।

इस कहानी ने इंदौर के नागरिकों के दिल में सहानुभूति और जिम्मेदारी जगाई है। यदि आप भी इस मासूम बच्ची की मदद करना चाहते हैं, तो ‘आर्ट ऑफ क्रिएशन’ और कस्तूरबा गांधी महिला कल्याण केंद्र के माध्यम से योगदान दे सकते हैं।

इस प्रयास के जरिये न केवल बच्ची की जिंदगी बचाई जा सकती है, बल्कि समाज में मदद और संवेदनशीलता की भावना भी बढ़ेगी। हर छोटा-सा योगदान भी इस नेक काम में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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