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भागीरथपुरा जल त्रासदी पर सरकार का सख्त रुख, IAS क्षितिज सिंघल को सौंपी गई इंदौर नगर निगम की कमान

इंदौर नगर निगम को नया आयुक्त मिल गया है। आईएएस अधिकारी क्षितिज सिंघल (IAS Kshitij Singhal) ने आधिकारिक रूप से इंदौर नगर निगम कमिश्नर के रूप में पदभार संभाल लिया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब शहर हाल के वर्षों की सबसे गंभीर जल त्रासदी से गुजर रहा है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैले डायरिया के कारण अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं।

इस गंभीर मामले को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रशासनिक स्तर पर कड़ा एक्शन लिया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्कालीन नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को पद से हटाकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ किया गया। इसके साथ ही एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया।

2 जनवरी, शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पूरे मामले में सख्ती दिखाते हुए पहले संबंधित अधिकारियों को हटाने और कलेक्टर को नोटिस देने के निर्देश दिए थे। लेकिन देर शाम उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया। इस फैसले को सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तौर पर देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ शब्दों में कहा कि जन स्वास्थ्य सरकार के लिए सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी नगर निगमों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) भी जारी की गई है।

भागीरथपुरा की घटना ने देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि नर्मदा जल सप्लाई लाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिल गया, जिससे ई-कोलाई और शिगेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए। यही कारण रहा कि इलाके में अचानक डायरिया का प्रकोप फैल गया।

नए नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करना और जनता का भरोसा लौटाना है। प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि नई टीम के नेतृत्व में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि इंदौर जैसे बड़े और संवेदनशील शहर में पानी की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में पूरे शहर में जल परीक्षण, पाइपलाइन जांच और क्लोरीनेशन अभियान को और तेज किया जाएगा।

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