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Indore Noise Pollution: कचरा गाड़ी की आवाज 25% कम होगी

Dainik R Times
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Indore Noise Pollution को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं। इंदौर बेंच ने कचरा गाड़ियों की तेज आवाज पर रोक लगाने को कहा है। नगर निगम को लाउडस्पीकर की आवाज तय सीमा तक लानी होगी। अगर यह मुमकिन न हो तो आवाज अभी से कम से कम 25 प्रतिशत घटानी होगी। अदालत ने तीन सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है। अगली सुनवाई 23 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।

न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। यह मामला 2023 से चली आ रही एक जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका अमिताभ उपाध्याय और एक अन्य याचिकाकर्ता ने दाखिल की थी। उनकी ओर से अधिवक्ता अभिनव धनोदकर पेश हुए। राज्य की ओर से सरकारी अधिवक्ता प्रद्युम्न कीबे पेश हुए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता ऋषभ सिंह चौहान पेश हुए।

अदालत ने कहा कि कचरा गाड़ियों से बजने वाला सफाई गीत लोगों को जगाने में मदद करता है। लेकिन कई बार इसकी आवाज कानूनी सीमा से ज्यादा हो जाती है। गाड़ियां गीत को पूरी आवाज में बजाती हैं। इससे सुबह-सुबह लोगों को परेशानी होती है। इसलिए निगम को आवाज घटानी ही होगी। अदालत राज्य के जवाब से भी संतुष्ट नहीं दिखी। उसका कहना था कि जमीनी हकीकत जवाब से अलग दिखती है।

Indore Noise Pollution: हर थाने और हर वार्ड में क्या होगा?

अदालत ने पुलिस के लिए भी कई निर्देश दिए हैं। इंदौर के हर थाने में पुलिसकर्मियों को आवाज मापने वाले यंत्र दिए जाएंगे। हर थाने के एसएचओ को हर वार्ड से दो स्वयंसेवक नियुक्त करने होंगे। ये स्वयंसेवक शोर की शिकायतों की जानकारी पुलिस को देंगे। वे अपने मोबाइल से उल्लंघन को रिकॉर्ड भी कर सकेंगे। जो लोग सीधे पुलिस के पास नहीं जाना चाहते, वे इन स्वयंसेवकों से संपर्क कर सकेंगे।

थानों के संपर्क नंबर भी सार्वजनिक करने को कहा गया है। ये नंबर अखबारों में और इंदौर पुलिस की वेबसाइट पर छपेंगे। इससे कोई भी व्यक्ति तुरंत शिकायत कर सकेगा। पुलिस को शिकायत पर कानून के अनुसार तुरंत कार्रवाई करनी होगी। अदालत ने कहा कि नवरात्रि और दशहरे के दौरान शहर ने बेलगाम शोर झेला था। उस दौरान पुलिस शोर रोकने में असहाय दिखी थी। खजराना के सहायक पुलिस आयुक्त आशीष पटेल पिछली सुनवाई में यंत्र लेकर आए थे। हालांकि उस यंत्र का सार्वजनिक रूप से कभी इस्तेमाल नहीं हुआ।

अदालत ने साइलेंस जोन की सूची को लेकर भी नाराजगी जताई है। राज्य को 24 सितंबर के आदेश के तहत सूची अखबारों में छापनी थी। लेकिन राज्य ने सूची की जगह सिर्फ अखबारों की कतरनें पेश की थीं। अब राज्य को पूरी सूची छापनी होगी। लोगों से उन प्रमुख स्थानों के सुझाव भी मांगे जाएंगे जो सूची से छूट गए हैं। पुलिस थानों को शोर की शिकायतों का पूरा रिकॉर्ड भी पेश करना होगा। इसमें खुद पुलिस की ओर से दर्ज शिकायतें भी शामिल होंगी।

इंदौर की एक और खबर यहां पढ़ें: MP Rent to Own Policy: किराए पर रहो, EMI से बनो मालिक। आदेश का पूरा विवरण यहां देखें: LiveLaw report।

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