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इंदौर में पहली बार पूर्वोत्तर संस्कृति का महासंगम, ऑक्टेव महोत्सव बना आकर्षण का केंद्र

इंदौर में सांस्कृतिक विविधता का एक भव्य और ऐतिहासिक नज़ारा देखने को मिल रहा है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की समृद्ध परंपरा, लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत करने वाला ऑक्टेव महोत्सव गुरुवार से शनिवार तक लालबाग परिसर में आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन इंदौर में पूर्वोत्तर संस्कृति का अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक उत्सव माना जा रहा है।

इस महोत्सव की सबसे बड़ी खासियत है इसका भव्य मंच, जिसे पूर्वोत्तर भारत के प्रतिष्ठित धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों से प्रेरित होकर तैयार किया गया है। मंच पर अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ, भगवान परशुराम से जुड़े पवित्र परशुराम कुंड, शांत वातावरण वाले स्वर्ण पैगोडा, तिब्बती स्तूप और रंग-बिरंगे प्रार्थना ध्वजों की आकर्षक प्रतिकृतियां दर्शकों को पूर्वोत्तर भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा पर ले जाती हैं।

करीब 100 फीट चौड़ा, 80 फीट लंबा और 60 फीट ऊंचा यह विशाल मंच प्रतिदिन शाम 7 बजे से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का साक्षी बनेगा। इस मंच पर मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के कलाकार अपने पारंपरिक लोक नृत्य और संगीत के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।

इस आयोजन को दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय और लोक संस्कृति मंच द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। आयोजक आस्था गोडबोले कार्लेकर और कार्यक्रम के समन्वयक एवं सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि इंदौर में पूर्वोत्तर संस्कृति की इतनी व्यापक और समग्र प्रस्तुति पहली बार देखने को मिल रही है।

ऑक्टेव महोत्सव में देशभर से 250 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं, वहीं 300 से अधिक शिल्पकार शिल्प मेले में भाग ले रहे हैं। यह शिल्प मेला 31 दिसंबर तक चलेगा, जहां पूर्वोत्तर राज्यों के पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, कलाकृतियां और स्थानीय व्यंजन उपलब्ध होंगे।

खास बात यह है कि महोत्सव में केवल पूर्वोत्तर ही नहीं, बल्कि मालवी व्यंजनों का भी स्वाद लिया जा सकता है। इसके अलावा बच्चों और परिवारों के लिए झूले, खेल और मनोरंजन क्षेत्र भी बनाए गए हैं, जिससे यह आयोजन हर आयु वर्ग के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।

ऑक्टेव महोत्सव न सिर्फ सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मंच है, बल्कि यह भारत की “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को भी मजबूती देता है। इंदौरवासियों के लिए यह आयोजन पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति, संगीत, खान-पान और परंपराओं को करीब से जानने और महसूस करने का एक दुर्लभ अवसर है।

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