ईशान किशन का दर्द: टीम इंडिया से बाहर होने के बाद फैंस के सामने खुला दिल
ईशान किशन का दर्द: टीम इंडिया से बाहर होने के बाद फैंस के सामने खुला दिल

विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26 में झारखंड की कप्तानी करते हुए हरियाणा के खिलाफ फाइनल में तूफानी शतक जड़कर अपनी टीम को पहली बार खिताब जिताया। इस मैच में उन्होंने 49 गेंदों पर 101 रन बनाए, जिसमें 6 चौके और कई छक्के शामिल थे। उनकी इस प्रदर्शन ने केवल फैंस को रोमांचित नहीं किया, बल्कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर भी सुकून और आत्मविश्वास दिया।
मैच के बाद ईशान किशन ने भावुक होकर उस मुश्किल दौर के बारे में बात की, जब उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “जब मेरा चयन नहीं हुआ, तो मुझे बहुत बुरा लगा। मैं अच्छा खेल रहा था, लेकिन मौका नहीं मिला। यह मेरे लिए एक कठिन समय था, लेकिन मैंने कभी उम्मीद नहीं खोई।” ईशान ने अपने बयान में यह भी बताया कि इस दौरान उन्होंने निरंतर अभ्यास और मनोबल बनाए रखा, जिससे वे अब खेल में फिर से चमक सके।
ईशान किशन ने खुलासा किया कि टीम इंडिया से बाहर होने के बावजूद उन्होंने हमेशा खुद पर विश्वास रखा। उन्होंने कहा, “मैं जानता था कि मेहनत का फल मिलेगा। झारखंड की कप्तानी मेरे लिए चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन मैंने अपनी टीम को जीत दिलाने के लिए पूरी ताकत लगा दी।” उनकी यह जीत सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उनकी टीम और झारखंड क्रिकेट के लिए भी गौरव का क्षण था।
इस अवसर पर ईशान किशन ने युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “कभी भी हार मत मानो। निराशा आएगी, लेकिन मेहनत और आत्मविश्वास से हर मुश्किल का सामना किया जा सकता है। यह मेरी कहानी भी यही सिखाती है।” उनका यह संदेश क्रिकेट के युवाओं और फैंस दोनों के लिए प्रेरक साबित हुआ।
ईशान किशन की इस उपलब्धि ने यह दिखा दिया कि असफलता केवल एक कदम पीछे हटने का अवसर देती है, और सही मेहनत और मानसिक दृढ़ता से सफलता फिर से हासिल की जा सकती है। उनकी तूफानी पारी और भावुक बयान ने क्रिकेट के मैदान पर और उसके बाहर भी उन्हें अलग पहचान दिलाई।
ईशान किशन का यह फाइनल प्रदर्शन और भावुक बयान उनके करियर की नई शुरुआत का प्रतीक है। फैंस ने सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ की और उनके आत्मविश्वास तथा मेहनत की सराहना की।





