विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को Russia-Ukraine युद्ध पर भारत की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया। Jaishankar beyond advocacy Russia Ukraine नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब केवल वकालत तक सीमित नहीं रहा। देश इस युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों में अब थोड़ा और शामिल हो गया है। नई दिल्ली में Munich Leaders Meeting में उन्होंने यह बात कही।
जयशंकर ने कहा, “हम कई सालों से इसकी वकालत करते आ रहे हैं। हाल के महीनों में हम ‘beyond advocacy’ थोड़ा और शामिल हुए हैं। इस सिलसिले में Russia और Ukraine दोनों से हमारी बातचीत चल रही है।” उनके मुताबिक भारत दोनों पक्षों के बीच मददगार बनने की कोशिश कर रहा है। इसे भारत की पहल का पहला सार्वजनिक स्वीकार माना जा रहा है।
Jaishankar Beyond Advocacy: किन मुद्दों पर चल रही बातचीत
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत की पहल कई अहम मुद्दों पर केंद्रित है। सबसे पहले Black Sea में जहाजों की सुरक्षा का मसला है। इसके बाद अनाज निर्यात, ऊर्जा निर्यात और ‘non-attack possibilities’ जैसे विषय आते हैं। उन्होंने साफ कहा कि ये सभी बातचीतें अभी जारी हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब दो दिन पहले Ukraine के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने कहा था कि भारत ने युद्धविराम के लिए “सबसे व्यापक” प्रस्ताव रखा है। तीन दिन पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास “शानदार विचार” हैं। इसलिए कूटनीतिक हलकों में इस बयान को खास अहमियत दी जा रही है।
Russia से रिश्तों पर जयशंकर का रुख
Russia के साथ संबंधों पर जयशंकर ने कहा कि भारत और Russia के बीच 1950 के दशक से ऐतिहासिक रूप से अच्छे रिश्ते रहे हैं। उन्होंने कहा, “Russia हमारे साथ तब खड़ा था जब हमारी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी।” उनके मुताबिक इसी विरासत ने दोनों देशों के रिश्तों को आकार दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत के हित Russia के साथ कई क्षेत्रों में जुड़े हैं।
जयशंकर 62वें Munich Security Conference में “From New Delhi to New Momentum” विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने अमेरिका की बदलती वैश्विक भूमिका, चीन के उदय और मिडिल पावर देशों की रणनीति जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। हाल में Houthi के Aramco हमले के दावे और North Korea के मिसाइल परीक्षण जैसे वैश्विक घटनाक्रमों के बीच भारत की यह कूटनीतिक पहल अहम मानी जा रही है। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक जयशंकर ने इस पहल के बारे में सीमित जानकारी ही साझा की।
