टॉप-न्यूज़राजनीति

कर्नाटक में CM पद पर बढ़ा तनाव: सिद्धारमैया के घर नाश्ते पर पहुंचे शिवकुमार, हाईकमान ने दिए सख्त निर्देश

कर्नाटक में CM पद पर बढ़ा तनाव: सिद्धारमैया के घर नाश्ते पर पहुंचे शिवकुमार, हाईकमान ने दिए सख्त निर्देश

कर्नाटक में सत्ता संतुलन को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व विवाद लंबे समय से सुर्खियों में है, लेकिन अब यह मामला कांग्रेस हाईकमान तक पहुंच गया है। हालात ऐसे बने कि शनिवार सुबह सिद्धारमैया ने अपने आधिकारिक निवास पर डीके शिवकुमार को नाश्ते के लिए आमंत्रित किया। यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार देर रात दोनों नेताओं को कांग्रेस हाईकमान से फोन गया, जिसमें उन्हें आपसी मतभेद दूर करने और सहयोगात्मक तरीके से आगे बढ़ने के निर्देश दिए गए। इसके बाद शनिवार सुबह सिद्धारमैया की ओर से शिवकुमार को नाश्ते के लिए बुलावा भेजा गया। यह घटनाक्रम अपने आप में संकेत देता है कि पार्टी नेतृत्व अब कर्नाटक सरकार में पैदा हो रहे असंतोष को ज्यादा बढ़ने नहीं देना चाहता।

कर्नाटक कांग्रेस के भीतर लंबे समय से खींचतान चल रही है। शिवकुमार खेमे का दावा है कि चुनाव से पहले उन्हें “पावर-शेयरिंग फॉर्मूला” का वादा किया गया था, जिसमें ढाई साल बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिलनी थी। हालांकि सिद्धारमैया गुट इससे इत्तेफाक नहीं रखता और उनका तर्क है कि मुख्यमंत्री पद का निर्धारण हाईकमान तय करेगा, कोई लोकल समझौता नहीं।

सत्ता संघर्ष का असर सरकार और संगठन दोनों पर स्पष्ट दिखने लगा है। हाल ही में कई विधायकों ने अप्रत्यक्ष रूप से शिवकुमार को समर्थन देने के संकेत देकर दबाव की राजनीति शुरू की। दूसरी ओर, सिद्धारमैया सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि कई अहम फैसलों में उपमुख्यमंत्री की भूमिका को कमतर किया जा रहा है। इससे दोनों गुटों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

शनिवार की सुबह हुई नाश्ता-मुलाकात में उम्मीद जताई जा रही है कि नेतृत्व विवाद पर खुलकर बातचीत होगी। सूत्र बताते हैं कि हाईकमान ने दोनों नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि 2024 चुनावों को देखते हुए पार्टी किसी भी तरह की अस्थिरता बर्दाश्त नहीं कर सकती। इसलिए सरकार की स्थिरता और एकता हर कीमत पर बरकरार रखनी होगी।

हालांकि सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों ही मीडिया के सामने इस विवाद को नकारते हुए खुद को “एकजुट टीम” बताते हैं, लेकिन अंदरखाने जारी तनाव किसी से छुपा नहीं है। पार्टी नेतृत्व भी इस बात से वाकिफ है कि यदि स्थिति संभाली नहीं गई तो विपक्ष इसका फायदा उठाने में देर नहीं करेगा।

यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच कई निर्णयों को लेकर तीखी नोकझोंक की खबरें बाहर आ रही थीं। चाहे वह बजट के प्रावधान हों, कैबिनेट विस्तार या बड़े प्रशासनिक फैसले—दोनों के बीच सहमति बनाना मुश्किल हो रहा था।

अब सबकी नजरें इस नाश्ता-मीटिंग के नतीजों पर टिकी हैं। क्या हाईकमान की कड़ी चेतावनी के बाद दोनों नेता मोर्चा छोड़कर एकजुट होंगे, या कर्नाटक की राजनीति में टकराव का नया अध्याय शुरू होने वाला है? आने वाले दिनों में इसका जवाब साफ हो जाएगा।

MORE NEWS>>>गोवा में पीएम मोदी ने 77 फीट ऊंची श्रीराम प्रतिमा का अनावरण किया, कर्नाटक में गीता पाठ में शामिल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close