कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक पिता की याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने अपने 14 साल के बेटे को कार की चाबी सौंपने के मामले में लगे गैर-इरादतन हत्या के आरोप को रद्द करने की मांग की थी। जस्टिस एम. नागाप्रसन्ना ने 16 अक्टूबर के आदेश में साफ कहा—जानबूझकर नाबालिग बच्चे को वाहन देने वाले माता-पिता पर मुकदमा चल सकता है। शर्त यह है कि उससे घातक हादसा हुआ हो। (Karnataka HC minor driving)
अदालत ने कहा कि कानून नाबालिगों को गाड़ी चलाने से यूं ही नहीं रोकता। बिना प्रशिक्षण और कानूनी योग्यता के किसी के हाथ में वाहन घोर खतरे का साधन बन सकता है। कोर्ट ने टिप्पणी की, “मोटर वाहन का स्टीयरिंग किसी बच्चे के हाथ में खिलौना नहीं बन सकता।” साथ ही कहा, “सार्वजनिक सड़क ऐसे शौक का खेल का मैदान नहीं बन सकती।”
Karnataka HC minor driving: क्या था पूरा मामला
यह मामला 10 दिसंबर 2020 की रात का है। मैसूर निवासी नदीम-उर-रहमान का 14 साल का बेटा पुराने बेंगलुरु-मैसूर रोड पर वोक्सवैगन वेंटो चला रहा था। यह कार उसके पिता को उनके नियोक्ता ने दी थी।
रात करीब 10 बजे दंडिनमरम्मा मंदिर के पास कार ने एक दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी। बाइक पर रमेश (40), उनकी पत्नी उषा (30) और पांच साल का बेटा मोनीश सवार थे। तीनों की मौके पर ही जान चली गई। परिवार का एक और बेटा गंभीर रूप से घायल हुआ।
पुलिस ने पिता को आरोपी नंबर दो बनाया। उन पर आईपीसी की धारा 279, 304ए और 337 के साथ मोटर वाहन अधिनियम की धाराएं लगाई गईं। चार्जशीट में धारा 304 भाग-2 (गैर-इरादतन हत्या) भी जोड़ी गई।
पिता की दलील और सरकारी वकील का जवाब
पिता का दावा था कि बेटे ने बिना उनकी जानकारी के कार निकाल ली थी। उनके वकील ने कहा कि यह ज्यादा से ज्यादा लापरवाही का मामला हो सकता है, न कि गैर-इरादतन हत्या का।
वहीं सरकारी वकील ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा सामग्री है। इससे पता चलता है कि पिता ने खुद बेटे को चाबी दी थी और गाड़ी चलाने की इजाजत दी थी। कथित तौर पर पहले भी ऐसा हो चुका था। ट्रायल कोर्ट ने पिता की डिस्चार्ज अर्जी पहले ही खारिज कर दी थी।
कोर्ट ने क्यों नहीं दी राहत
हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ हादसे के नतीजे से लापरवाही गैर-इरादतन हत्या में नहीं बदलती। इसके लिए यह साबित होना चाहिए कि आरोपी को खतरनाक नतीजे का ज्ञान था। यह सवाल ट्रायल में तय होगा, इसलिए कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने आंकड़ों का हवाला भी दिया। कर्नाटक में 2025-26 में नाबालिगों से जुड़े 751 हादसे हुए, जो राज्यों में छठा सबसे बड़ा आंकड़ा है (Indian Express)। अदालत ने कहा कि अप्रशिक्षित हाथों को वाहन सौंपने वाले लोग हादसे के नतीजों से पूरी तरह बच नहीं सकते।
