खरगोन के नावघाट खेड़ी में 250 से अधिक तोतों की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फूड पॉइजनिंग की आशंका से हड़कंप

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के नावघाट खेड़ी क्षेत्र में पक्षियों की सामूहिक मौत ने प्रशासन और ग्रामीणों को गहरे संकट में डाल दिया है। बीते कुछ दिनों में यहां 250 से अधिक तोते मृत पाए गए, जबकि कबूतर और गौरैया की मौत की भी पुष्टि हुई है। अचानक इतनी बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत से इलाके में हड़कंप मच गया है और लोग दहशत में हैं।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और पूरे क्षेत्र को सतर्कता के घेरे में ले लिया गया। मृत पक्षियों को सुरक्षित तरीके से एकत्र कर उनका पोस्टमार्टम कराया गया, जिसकी शुरुआती रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🧪 पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
डॉक्टरों द्वारा जारी प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृत तोतों की बड़ी और छोटी आंत में चावल और छोटे पत्थर पाए गए हैं। इसके साथ ही पक्षियों की आंतें और लिवर पूरी तरह लाल मिले, जो गंभीर आंतरिक संक्रमण या ज़हर के प्रभाव की ओर इशारा करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति सामान्य बीमारी या ठंड के कारण नहीं हो सकती। डॉक्टरों ने ठंड या किसी संक्रामक बीमारी से मौत की संभावना को साफ तौर पर खारिज किया है। शुरुआती निष्कर्षों में यह सामने आया है कि पक्षियों की मौत फूड पॉइजनिंग यानी किसी जहरीले या दूषित खाद्य पदार्थ के सेवन से हुई हो सकती है।
⚠️ दूषित भोजन बना मौत की वजह?
संभावना जताई जा रही है कि खेतों या खुले इलाकों में फेंका गया दूषित अनाज या जहरीला चारा पक्षियों की मौत का कारण बना। पक्षी भोजन के साथ पत्थर भी निगल लेते हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मौत होना किसी गंभीर लापरवाही या साजिश की ओर भी इशारा करता है।
वन विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि कहीं कीटनाशक युक्त चावल या अन्य रसायनों से मिला खाना पक्षियों ने तो नहीं खा लिया। यदि ऐसा साबित होता है तो यह केवल वन्यजीवों ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरे की चेतावनी होगी।
🌿 वन विभाग अलर्ट, जांच तेज
वन विभाग ने पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी है। आसपास के गांवों में लोगों से अपील की गई है कि वे खुले में खाद्य सामग्री न फेंकें और मृत पक्षियों को न छुएं। इसके साथ ही पानी के स्रोतों और खेतों की भी जांच की जा रही है।
वन अधिकारियों का कहना है कि फाइनल पोस्टमार्टम और लैब रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी। यदि किसी जहरीले पदार्थ की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
🚨 पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी
विशेषज्ञों के मुताबिक, पक्षियों की इस तरह सामूहिक मौत पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। इससे न केवल जैव विविधता प्रभावित होती है, बल्कि यह इंसानों के लिए भी संभावित स्वास्थ्य संकट का संकेत हो सकता है।





