Kolkata stampede मामले में सोमवार सुबह बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। चोरबगान पंडाल हादसे के बाद गिरीश पार्क थाने के ऑफिसर-इन-चार्ज सुमित कुमार घोष को हटा दिया गया है। लालबाजार के आदेश के बाद डिटेक्टिव विभाग के हीराक दलापति को थाने का अंतरिम प्रभार सौंपा गया है। 19 लोगों की मौत वाले इस हादसे के बाद पुलिस महकमे पर सवाल उठ रहे थे।
इस बीच रविवार को बैंकशाल कोर्ट ने गिरफ्तार सातों आरोपियों को 28 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस ने 1 नवंबर तक की रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने दस दिन की रिमांड दी। सभी आरोपी दुर्गा पूजा पंडाल की आयोजन समिति और निजी सुरक्षा एजेंसी से जुड़े हैं।
रिमांड पर भेजे गए आरोपियों में समिति के सचिव राज कुमार सेवडा उर्फ राजा (48), उपाध्यक्ष संतनु दुबे (55), बांस के ढांचे का काम देखने वाले बिप्लब मुखर्जी उर्फ जॉय (48), कौशिक साहा (53), पिंटू डे (51), सुमन चक्रवर्ती (30) और राजेश पाल (29) शामिल हैं। सभी को शनिवार रात हिरासत में लिया गया था। इससे पहले सात आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई थी, जिसके बाद अब कोर्ट से रिमांड मिली है।
जांच में क्या सामने आया
पुलिस की शुरुआती जांच में तीन बड़ी खामियां उजागर हुई हैं। पहला, अचानक हुई बारिश के बाद माइक से गलत ऐलान किया गया कि पंडाल गिर सकता है, जिससे भगदड़ मच गई। दूसरा, भीड़ प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती गई। तीसरा, बारिश से बचने के लिए होम गार्ड प्रवेश द्वार छोड़कर चले गए, जिससे गेट पर कोई नियंत्रण नहीं रहा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार फॉरेंसिक टीम पहले ही पंडाल परिसर की जांच कर चुकी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस के अधिकारी मौके पर तैनात कर्मियों से भी पूछताछ कर रहे हैं। यह देखा जा रहा है कि आयोजन स्थल पर इतनी भारी भीड़ कैसे इकट्ठी हुई।
घायलों की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। 25 घायलों में से 23 को अस्पताल से छुट्टी के लिए फिट घोषित कर दिया गया है। दो घायल अभी आईसीयू में हैं, जिनके फ्रैक्चर का इलाज चल रहा है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये और सरकारी नौकरी देने का ऐलान पहले ही कर दिया था।
गौरतलब है कि शनिवार शाम करीब 7:40 बजे चोरबगान सार्वजनीन पंडाल में बारिश के बीच भीड़ के धक्का-मुक्की से भगदड़ मची थी। हादसे में 19 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे। इसके बाद से कोलकाता पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
अब सबकी नजर जांच के अगले चरण पर है। उम्मीद है कि रिमांड के दौरान पूछताछ से यह साफ होगा कि पंडाल के अंदर सुरक्षा के इंतजाम कौन देख रहा था और ऐलान किसने करवाया था। दोषियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है।
