लोकसभा में वंदे मातरम पर विशेष चर्चा: पीएम मोदी ने शुरू किया अपना वक्तव्य, इतिहास और प्रेरणा पर जोर
लोकसभा में वंदे मातरम पर विशेष चर्चा: पीएम मोदी ने शुरू किया अपना वक्तव्य, इतिहास और प्रेरणा पर जोर

नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार को अपने आठवें दिन पहुंच गया, और इस दिन का मुख्य आकर्षण था लोकसभा में वंदे मातरम पर विशेष चर्चा। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना वक्तव्य रखते हुए वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर इसका महत्व समझाया। राज्यसभा में इस पर मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चर्चा करेंगे।
आज की कार्यवाही के दौरान राज्यसभा ने पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद लोकसभा में प्रश्नकाल संपन्न होने के बाद पीएम मोदी ने अपने वक्तव्य की शुरुआत की। प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। उन्होंने कहा कि यदि हम सब मिलकर इसका सदुपयोग करें तो यह गीत देश की एकता और गौरव का प्रतीक बनेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने वंदे मातरम के इतिहास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में लिखा था। यह गीत उस समय लिखा गया जब 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारत पर अंग्रेजों का दबदबा था। ब्रिटिश सरकार ने देशवासियों को कमजोर और आलसी बताने का प्रयास किया, और इसी चुनौती के जवाब में बंकिम चंद्र ने 1882 में ‘आनंदमठ’ के माध्यम से वंदे मातरम प्रस्तुत किया।
पीएम मोदी ने कहा, “ईंट का जवाब पत्थर से दिया गया और वंदे मातरम का जन्म हुआ। यह गीत भारतवासियों को साहस और आत्मविश्वास का संदेश देता है।” उन्होंने वंदे मातरम के मंत्र ने स्वतंत्रता आंदोलन में ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान की, इसे देशभक्ति और त्याग का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री ने इतिहास में देशभक्ति के कई उदाहरण दिए। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल, भगवान बिरसा मुंडा और गुरु तेगबहादुर को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सभी व्यक्तित्व देशभक्ति और सामाजिक समर्पण के आदर्श प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम के 50 साल पूरे होने पर भारत गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, 100 साल पूरे होने पर देश आपातकाल की स्थिति में था और संविधान का गला घोंटा गया। ऐसे समय में देशभक्ति और राष्ट्रगीत ने लोगों को जेल की सलाखों के पीछे जाने के लिए प्रेरित किया।
लोकसभा में प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने वेदों का उदाहरण देते हुए कहा, “माता भूमि पुत्रोऽहं पृथिव्याः”, जिसका अर्थ है कि पृथ्वी मेरी माता है और हम उसके पुत्र हैं। उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों का जिक्र करते हुए कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।
इस चर्चा के दौरान पश्चिम बंगाल की जयनगर लोकसभा सीट से निर्वाचित तृणमूल कांग्रेस सांसद प्रतिमा मंडल ने सवाल उठाया कि स्वदेश दर्शन और प्रसाद योजना जैसी केंद्र की योजनाओं में गंगा सागर को क्यों शामिल नहीं किया गया। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जवाब दिया कि भारत सरकार ने राज्य सरकार को पर्याप्त आर्थिक मदद दी है, लेकिन राज्य सरकार ने प्रस्ताव नहीं भेजा। उन्होंने सियासत न करने और परियोजनाओं के लिए राज्य से पहल करने की अपील की।
केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने अन्य सांसदों के सवालों का भी जवाब दिया। तमिलनाडु की कुड्डालोर लोकसभा सीट से निर्वाचित सांसद एमके विष्णु प्रसाद ने रेलवे टूरिज्म और त्योहारी सीजन के लिए पर्यटकों की व्यवस्था पर सवाल पूछा। शेखावत ने प्रयागराज के महाकुंभ का उदाहरण देते हुए बताया कि सरकार देशभर में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त इंतजाम करती है।
छत्तीसगढ़ की महासमुंद लोकसभा सीट से भाजपा सांसद रूप कुमारी चौधरी ने छत्तीसगढ़ के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों सिरपुर और राजीम के कायाकल्प के लिए उठाए जा रहे कदमों पर सवाल किया। पर्यटन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार से प्रस्ताव आने पर इसे गंभीरता से देखा जाएगा।
गुजरात की अहमदाबाद पश्चिम सीट से निर्वाचित भाजपा सांसद दिनेश मकवाना ने प्रसाद योजना के तहत धार्मिक स्थलों के विकास पर सवाल किया। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 2014-15 में पीएम मोदी के मार्गदर्शन में योजना शुरू की गई, जिससे देशभर में पर्यटकों और श्रद्धालुओं का अनुभव बेहतर हुआ।
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने केरल के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर के सवाल के जवाब में राष्ट्रीय युवा कोर (NYC) योजना पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लिए एक लाख युवाओं को तैयार करने का आह्वान किया। इस दिशा में सरकार गंभीर रूप से प्रयासरत है और माय भारत प्लेटफॉर्म पर 2 करोड़ युवाओं ने स्वेच्छा से पंजीकरण कराया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा कि वंदे मातरम का महत्व केवल ऐतिहासिक नहीं है, बल्कि यह आज भी देशवासियों को देशभक्ति और एकता का संदेश देता है। उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक अवसर का सदुपयोग करें और देश की एकता और गौरव के लिए कार्य करें।





