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मंदसौर में किसान विरोध: प्याज की शव यात्रा, 1 रुपये किलो दाम से भड़के

मंदसौर में किसान विरोध: प्याज की शव यात्रा, 1 रुपये किलो दाम से भड़के

मंदसौर। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में किसानों ने एक अनोखी और नाटकीय विरोध प्रदर्शन की। जिले के किसानों ने प्याज की असहनीय कीमतों और 1 रुपये किलो के न्यूनतम भाव से नाराज होकर प्याज की ‘शव यात्रा’ निकालकर सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी। इस प्रदर्शन ने राज्यभर के किसानों और आम जनता का ध्यान आकर्षित किया।

किसानों का कहना है कि प्याज की कीमतों में लगातार गिरावट ने उनकी आय को बेहद प्रभावित किया है। मंडी में प्याज का भाव सिर्फ 1 रुपये किलो रह गया है, जिससे उन्हें खेती के खर्चे भी पूरा करना मुश्किल हो गया है। किसानों ने बताया कि खेतों में प्याज की पैदावार तो हुई है, लेकिन बिक्री मूल्य इतना कम है कि लागत भी नहीं निकल पा रही है।

इस प्रदर्शन में किसानों ने प्याज को लाल, सफेद और हरे रंग के पोस्टरों और बैनरों के साथ ‘शव यात्रा’ के रूप में मंडी की गलियों में निकाला। प्रदर्शनकारियों ने प्याज को मूर्तियों की तरह सजाकर यह संदेश दिया कि किसान अपनी मेहनत का उचित मूल्य न मिलने से “कृषि की मौत” देख रहे हैं।

किसानों की मांगें स्पष्ट हैं:

  • प्याज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तुरंत बढ़ाया जाए।

  • मंडी में उचित मूल्य पर बिक्री की व्यवस्था की जाए।

  • सरकारी खरीद केंद्रों और नीतियों के माध्यम से किसानों को नुकसान से बचाया जाए।

प्रदर्शन के दौरान किसान जोर-जोर से नारे लगाते रहे: “हमारी मेहनत का सही मूल्य चाहिए!” और “किसान का अपमान बंद करो!”। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखते हुए पुलिस बल तैनात किया, ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे।

किसानों का यह विरोध केवल मंदसौर तक ही सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर भी किसानों की इस अनोखी ‘शव यात्रा’ की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो गए। कृषि विशेषज्ञों ने इस तरह के प्रदर्शन को चेतावनी बताया कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज हो सकता है।

मध्यप्रदेश के कृषि विभाग ने इस मुद्दे पर कहा कि प्याज की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण आपूर्ति और मांग का असंतुलन और मौसम की अनियमितताओं के कारण हुआ है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे संयम बनाए रखें और सरकारी खरीद केंद्रों का उपयोग करें।

किसानों का कहना है कि यह विरोध केवल शुरुआत है। यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो राज्यभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। मंदसौर के इस प्रदर्शन ने किसानों की मुश्किलों और उनकी आवाज को प्रमुखता से उजागर किया है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को किसानों की आय बढ़ाने और फसल के उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए स्थायी समाधान तैयार करने की आवश्यकता है। अन्यथा, प्याज और अन्य फसलों के लिए ऐसे प्रदर्शन और आंदोलन भविष्य में बढ़ सकते हैं।

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