भारत को कुश्ती में पहली महिला विश्व चैंपियन मिल गई है। Manisha Bhanwala अब भारतीय कुश्ती की सबसे बड़ी सितारा बन गई हैं। मनीषा भानवाला ने अस्ताना में विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीत लिया है। उन्होंने 59 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में अमेरिका की अबीगैल नेट को 8-6 से हराया। मनीषा एक समय 0-6 से पिछड़ रही थीं।
0-6 से पिछड़कर 8-6 से जीता मुकाबला
फाइनल मुकाबले की शुरुआत मनीषा के लिए खराब रही। पहले दौर के अंत तक वह 0-6 से पीछे थीं। इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की और लगातार अंक बटोरे। अंत में उन्होंने 8-6 से जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। यह जीत भारतीय महिला कुश्ती के लिए मील का पत्थर है।
17 साल की उम्र में शुरू की थी कुश्ती
मनीषा हरियाणा के जींद जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने 17 साल की उम्र में कुश्ती शुरू की थी। सेहत ठीक रखने के लिए उन्होंने अखाड़े का रुख किया था। अब वह 29 साल की हैं और छठी बार विश्व चैंपियनशिप में उतरी थीं। इस बार उन्होंने वजन वर्ग बदलकर 59 किलोग्राम में खेलने का फैसला किया। यह फैसला सोने पर सुहागा साबित हुआ।
एशियाई चैंपियनशिप में भी ऐसे ही जीता था स्वर्ण
मनीषा ने 2025 में एशियाई चैंपियनशिप में 62 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीता था। वहां भी उन्होंने पिछड़ने के बाद वापसी की थी। उत्तर कोरिया की किम ओक-जू को उन्होंने 8-7 से हराया था। यह जीत चार साल बाद भारत को मिला पहला महिला एशियाई स्वर्ण था।
सुशील कुमार के बाद दूसरी भारतीय विश्व चैंपियन
मनीषा से पहले सिर्फ सुशील कुमार ही विश्व चैंपियन बने थे। सुशील ने 2010 में मॉस्को में 66 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीता था। मनीषा अब इस सूची में शामिल होने वाली दूसरी भारतीय हैं। वह पहली भारतीय महिला विश्व चैंपियन भी बन गई हैं। इससे पहले अंशु मलिक 2021 में रजत पदक तक पहुंची थीं।
भारत को चार पदक, तीन महिलाएं फाइनल में
भारतीय महिला टीम ने इस चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया। काजल ढोचक ने 76 किलोग्राम में रजत पदक जीता। नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम में रजत पदक अपने नाम किया। तनु शर्मा ने 72 किलोग्राम में कांस्य पदक जीता। पहली बार एक ही संस्करण में तीन भारतीय महिलाएं फाइनल में पहुंची थीं।
युवा पहलवानों को मिलेगी बड़ी प्रेरणा
59 किलोग्राम वर्ग ओलंपिक कार्यक्रम में शामिल नहीं है। फिर भी यह जीत भारतीय कुश्ती के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है। मनीषा की जीत से युवा महिला पहलवानों को बड़ी प्रेरणा मिलेगी। देश में कुश्ती की लोकप्रियता भी इससे और बढ़ेगी।
