अगर आप रोजमर्रा की खरीदारी के लिए मोबाइल से QR कोड स्कैन करके UPI पेमेंट करते हैं, तो 2 अक्टूबर को सतर्क रहें। देश के बड़े व्यापारी संगठनों ने इस दिन ‘No UPI Day’ मनाने का ऐलान किया है। इस दिन दुकानों पर UPI से पेमेंट स्वीकार नहीं किया जाएगा।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (FAIVM) और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) समेत 500 से ज्यादा व्यापारी संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं। पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन और महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स (MACCIA) ने भी इसका समर्थन किया है।
No UPI Day पर क्या होगा
2 अक्टूबर को व्यापारी अपनी दुकानों पर लगे UPI QR कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और अन्य डिजिटल पेमेंट डिवाइस को काले कपड़े से ढककर विरोध जताएंगे। इस दिन ग्राहकों को नकद या कार्ड से भुगतान करना होगा।
तारीख का चुनाव भी प्रतीकात्मक है, क्योंकि 2 अक्टूबर गांधी जयंती का दिन है। व्यापारी संगठन इस दिन को अपने प्रदर्शन के लिए खास मान रहे हैं। इससे पहले भी UPI शुल्क के नए नियमों को लेकर व्यापारियों में नाराजगी सामने आ चुकी है।
विरोध की यह लहर मध्य प्रदेश से शुरू हुई थी। 23 सितंबर को भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई शहरों में करीब 125 व्यापारी संगठनों ने एक दिन का ‘नो यूपीआई डे’ मनाया था। इससे प्रदेश में करीब 25 प्रतिशत व्यापार प्रभावित हुआ था। इससे पहले इंदौर में 125 व्यापारी संगठनों के No-UPI Day की खबर यहां पढ़ें
इंदौर के गारमेंट्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर 15 अक्टूबर से पहले यह नियम वापस नहीं लिया गया, तो व्यापारी UPI QR कोड मशीनों को पानी में बहा देंगे।
MDR चार्ज क्या है और व्यापारी क्यों नाराज हैं
दरअसल, सरकार और NPCI 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लगाने जा रहे हैं। यह नियम 15 अक्टूबर से लागू होना है। व्यापारियों का कहना है कि वे पहले से कम मार्जिन पर काम करते हैं, इसलिए यह अतिरिक्त बोझ असहनीय है।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI पर कोई टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं लगाया जा रहा है। MDR को लेकर सरकार कारोबारियों के साथ बैठक भी करने जा रही है। अब सबकी नजर इस बैठक और 2 अक्टूबर के विरोध पर टिकी है। स्रोत: चौथा खंभा

