No UPI Day Indore: कांग्रेस ने बांटे ‘कैश’ वाले चश्मे

Dainik R Times
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No UPI Day Indore: कांग्रेस ने बांटे ‘NO UPI-ONLY CASH’ वाले चश्मे

इंदौर में No UPI Day Indore को लेकर कांग्रेस ने अनोखा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस नेताओं ने व्यापारियों को ‘NO UPI-ONLY CASH’ लिखे चश्मे बांटे। यह विरोध 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर प्रस्तावित MDR को लेकर है। नया MDR नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना है।

No UPI Day Indore में कांग्रेस का प्रदर्शन

वहीं, कांग्रेस नेताओं ने सियागंज और छावनी क्षेत्र में चश्मे बांटे। इस अभियान का नेतृत्व विवेक खंडेलवाल और गिरीश जोशी ने किया। नेताओं ने इसे व्यापारियों की चिंता सामने रखने का तरीका बताया।

इस दौरान व्यापारियों से डिजिटल भुगतान शुल्क को लेकर चर्चा की गई। कांग्रेस नेताओं ने MDR व्यवस्था पर सरकार से पुनर्विचार की मांग की।

₹2,000 से ऊपर UPI पर कितना MDR लगेगा?

हालांकि, नया शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार पात्र P2M UPI भुगतान में ₹2,000 से ऊपर 0.4% MDR लगेगा। यह शुल्क व्यापारी अपने acquiring bank को देगा। ₹75,000 या उससे ज्यादा के भुगतान पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 होगी।

₹2,000 तक के भुगतान पर यह मानक MDR लागू नहीं होगा। इसके अलावा, छोटे QR व्यापारियों के लिए भी कुछ छूट रखी गई है। P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति UPI भुगतान भी इस शुल्क के दायरे में नहीं है।

व्यापारियों की लागत बढ़ने की चिंता

इसके अलावा, कांग्रेस नेताओं ने छोटे कारोबार पर असर की बात कही। उनका कहना है कि कम मार्जिन वाले व्यापार में अतिरिक्त शुल्क महत्वपूर्ण हो सकता है।

किराना, फुटकर और छोटे कारोबार में लागत बढ़ने की चिंता जताई गई। हालांकि, शुल्क का वास्तविक आर्थिक असर कारोबार और भुगतान के प्रकार पर निर्भर करेगा।

ग्राहकों पर शुल्क डालने का मुद्दा

इसी बीच, व्यापारी संगठनों ने भी लागत को लेकर चिंता जताई है। कुछ व्यापारियों ने कहा है कि वे शुल्क खुद वहन करेंगे या नकद भुगतान को बढ़ावा दे सकते हैं। हालांकि, सरकार के अनुसार MDR को ग्राहक पर सीधे नहीं डाला जाना है।

इंदौर में व्यापारियों ने 23 सितंबर को ‘No UPI Day’ मनाने का फैसला पहले ही किया था। शहर के कई व्यापारिक संगठनों ने इस विरोध में भाग लेने की घोषणा की थी।

‘NO UPI-ONLY CASH’ चश्मे क्यों बांटे?

बाद में, कांग्रेस नेताओं ने चश्मों को विरोध का प्रतीक बताया। इन चश्मों पर ‘NO UPI-ONLY CASH’ लिखा गया था। नेताओं के मुताबिक, इसके जरिए MDR को लेकर व्यापारियों की चिंता सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

विवेक खंडेलवाल और गिरीश जोशी ने व्यापारिक संगठनों से चर्चा की मांग रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी नई व्यवस्था के आर्थिक असर का अध्ययन होना चाहिए।

इंदौर में पहले से चल रहा है No UPI विरोध

साथ ही, इंदौर के व्यापारिक संगठनों ने पहले भी विरोध की घोषणा की थी। व्यापारियों ने UPI स्कैनर और पेमेंट डिवाइस को काले कपड़े से ढकने की बात कही थी। कुछ संगठनों ने 23 सितंबर को UPI भुगतान नहीं लेने का निर्णय बताया था।

इस विरोध का मुख्य मुद्दा 15 अक्टूबर से लागू होने वाला MDR है। फिलहाल व्यापारिक संगठन सरकार से इस व्यवस्था पर संवाद की मांग कर रहे हैं।

सरकार के नए UPI नियम में क्या बदलेगा?

इसके अलावा, नया ढांचा केवल चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर लागू होगा। सामान्य ग्राहक के UPI इस्तेमाल पर कोई प्रत्यक्ष शुल्क नहीं रखा गया है। छोटे भुगतान और P2P ट्रांजैक्शन भी इस व्यवस्था से बाहर हैं।

अब इंदौर में व्यापारिक संगठनों के विरोध के बीच यह मुद्दा चर्चा में है। आगे सरकार और व्यापारी संगठनों के बीच बातचीत पर नजर रहेगी।

UPI MDR क्या है?
Merchant Discount Rate यानी MDR वह शुल्क है जो पात्र व्यापारी लेन-देन पर व्यापारी पक्ष से लिया जाता है।

₹2,000 से ऊपर कितना MDR है?
मानक पात्र P2M UPI भुगतान पर 0.4% MDR है। ₹75,000 या उससे ज्यादा के भुगतान पर यह ₹300 तक सीमित है।

कब लागू होगा?
नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना है।

क्या ग्राहक से सीधे शुल्क लिया जाएगा?
नहीं। मौजूदा सरकारी व्यवस्था के अनुसार MDR ग्राहक पर नहीं डाला जाना है।

इंदौर में क्या विरोध हुआ?
23 सितंबर को ‘No UPI Day’ के तहत व्यापारिक संगठनों ने UPI भुगतान के विरोध की घोषणा की। कांग्रेस नेताओं ने भी ‘NO UPI-ONLY CASH’ चश्मे बांटे।

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