NSE Self Listing: खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग?

Dainik R Times
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के चेयरमैन Srinivas Injeti ने कहा है कि भारत के पूंजी बाजार के परिपक्व होने के साथ NSE को self listing की संभावना पर विचार करना चाहिए। शुक्रवार को दिया गया यह बयान NSE के BSE पर शेयर बाजार में डेब्यू (24 सितंबर) के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसमें एक्सचेंज की वैल्यूएशन करीब 47 अरब डॉलर आंकी गई।

Injeti ने एक इंटरव्यू में कहा कि 15 साल पहले एक्सचेंजों को लिस्ट होने की इजाजत ही नहीं थी, लेकिन 2012 में नियम बदले। हालांकि नियामक ने हितों के टकराव की आशंका के चलते शर्त रखी कि एक्सचेंज अपने खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता, क्योंकि वह खुद को रेगुलेट नहीं कर सकता।

क्यों अटकी है self listing

दरअसल, एक्सचेंज सिर्फ कारोबारी संस्था नहीं, बल्कि फ्रंटलाइन रेगुलेटर भी होता है। वह लिस्टेड कंपनियों की निगरानी, खुलासों और इनसाइडर ट्रेडिंग पर नजर रखता है। इसलिए खुद के शेयरों की ट्रेडिंग अपने ही प्लेटफॉर्म पर होने से संरचनात्मक हित-टकराव पैदा होगा।

इसी वजह से SEBI के नियमों के तहत NSE को प्रतिद्वंद्वी BSE पर लिस्ट होना पड़ा — ठीक वैसे ही जैसे 2017 में BSE, NSE पर लिस्ट हुआ था। Injeti का तर्क है कि लंदन स्टॉक एक्सचेंज, Nasdaq और NYSE की पैरेंट कंपनी ICE जैसे वैश्विक एक्सचेंज मजबूत रेगुलेटरी दीवारों के साथ self listing की इजाजत देते हैं, इसलिए भारत को भी इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।

SEBI का रुख: अभी जल्दबाजी होगी

हालांकि SEBI चेयरमैन Tuhin Kanta Pandey ने 18 सितंबर को ही इस अटकलबाजी को खारिज कर दिया था। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि NSE की ओर से self listing का कोई औपचारिक प्रस्ताव या पत्र नहीं मिला है और मौजूदा नियमों में इसकी इजाजत नहीं है।

NSE के MD और CEO Ashish Chauhan भी पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि एक्सचेंज ने SEBI से ऐसी कोई अनुमति नहीं मांगी है। इसलिए फिलहाल NSE के शेयर सिर्फ BSE पर ही ट्रेड होंगे — self listing पर फैसला भविष्य की नियामक समीक्षा पर टिका है।

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