केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है (Pinarayi Vijayan SC)। बुधवार को अवकाशकालीन पीठ ने CMRL-Exalogic मामले में विजयन के खिलाफ विजिलेंस जांच पर सात दिन की रोक लगा दी। पीठ में जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि दर्ज FIR बरकरार रहेगी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ का आदेश रद्द कर दिया। खंडपीठ ने विजयन को अपील की अनुमति देने से इनकार किया था। यह अपील एकल न्यायाधीश के FIR वाले आदेश के खिलाफ थी। अब विजयन अपील कर सकेंगे। उनके साथ बेटी वीणा टी. और दामाद पी.ए. मोहम्मद रियास भी अपील कर सकेंगे।
विजयन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि 82 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है। उन्हें कठोर कार्रवाई का अंदेशा है। इस पर पीठ ने जांच सात दिन रोक दी। इससे याचिकाकर्ता अपील दायर कर सकेंगे।
Pinarayi Vijayan SC: हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल
सुनवाई में जस्टिस बागची ने एकल न्यायाधीश के आदेश में विरोधाभास बताए। पीठ ने पूछा कि FIR का आदेश देने से पहले याचिकाकर्ताओं को क्यों नहीं सुना गया। अदालत ने ED को भी चेतावनी दी। ED को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जाना चाहिए। पीठ ने एक और अहम सवाल उठाया। क्या PMLA की धारा 66(2) के तहत मिली जानकारी पर FIR दर्ज करना अनिवार्य है? इस पर विचार जरूरी है।
क्या है CMRL-Exalogic मामला
आरोप है कि CMRL ने Exalogic Solutions को करीब 2.78 करोड़ रुपये दिए थे। CMRL यानी कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड। Exalogic वीणा की पूर्व स्वामित्व वाली IT कंपनी है। केरल हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने 9 अक्टूबर को FIR का आदेश दिया था। यह आदेश भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत था। इसके बाद 15 अक्टूबर को खंडपीठ ने अंतरिम राहत से इनकार कर दिया था। वहीं ED ने 23 अक्टूबर को पूछताछ का समन भी जारी किया है।
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सीमा स्पष्ट कर दी। उसकी टिप्पणियां सिर्फ अपील के अधिकार तक सीमित हैं। FIR के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी गई है। ‘आप कितने भी ऊंचे हों, कानून आपसे ऊपर है,’ अदालत ने कहा। अब मामला केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ के पास जाएगा। वही अपील पर फैसला करेगी।
