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गोवा में पीएम मोदी ने 77 फीट ऊंची श्रीराम प्रतिमा का अनावरण किया, कर्नाटक में गीता पाठ में शामिल

गोवा में पीएम मोदी ने 77 फीट ऊंची श्रीराम प्रतिमा का अनावरण किया, कर्नाटक में गीता पाठ में शामिल

गोवा/उडुपी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में 77 फीट ऊंची श्रीराम प्रतिमा का भव्य अनावरण किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में हजारों श्रद्धालु और राजनीतिक हस्तियां शामिल रहीं। यह विशाल प्रतिमा रामकथा और भारतीय संस्कृति का प्रतीक मानी जा रही है और देश के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पीएम मोदी ने श्रीराम प्रतिमा के अनावरण के बाद कहा कि भगवान राम का संदेश सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक मूल्यों से भी भरा हुआ है। उन्होंने उपस्थित लोगों से इस संदेश को अपने जीवन में उतारने की अपील की।

गोवा में अनावरण कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी कर्नाटक के उडुपी भी पहुंचे, जहां उन्होंने श्रीकृष्ण मठ में एक लाख लोगों के साथ लक्ष कंठ गीता पारायण में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में छात्रों, साधु-संतों और आम नागरिकों ने श्रीमद्भगवद गीता का पाठ किया। पीएम मोदी ने गीता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता हमें धर्म, कर्तव्य और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराती है।

उडुपी में आयोजित कार्यक्रम में जगद्गुरु श्री सुगुनेंद्र तीर्थ स्वामीजी ने पीएम मोदी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से युवा पीढ़ी में धार्मिक और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ेगी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने मठ में सोने का कलश भी चढ़ाया, जो धार्मिक परंपरा और समर्पण का प्रतीक है।

विशेष रूप से इस कार्यक्रम में उपस्थित लोग और श्रद्धालु प्रधानमंत्री के भाषण और गीता पाठ से भावविभोर दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि गीता का ज्ञान जीवन में मार्गदर्शन और संकटों में धैर्य का संदेश देता है।

गोवा में श्रीराम प्रतिमा और कर्नाटक में गीता पाठ कार्यक्रम से पीएम मोदी की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता सामने आई है। इन आयोजनों ने देशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के महत्व को उजागर किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि गोवा में स्थापित 77 फीट ऊंची श्रीराम प्रतिमा न केवल देशवासियों के लिए श्रद्धा का केंद्र बनेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी। वहीं, कर्नाटक में गीता पाठ ने युवाओं को आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा देने का काम किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों आयोजनों के माध्यम से देशवासियों को यह संदेश देने की कोशिश की कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखना और उनका पालन करना आज के समय में भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

गोवा और कर्नाटक में आयोजित ये दो कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, धर्म और आस्था की एकता को दर्शाते हैं और आने वाले समय में देशभर में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों को प्रोत्साहित करेंगे।

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