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PM Modi: 500 GW हरित ऊर्जा, ₹20 लाख करोड़ निवेश

Dainik R Times
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत ने पेरिस समझौते का लक्ष्य पांच साल पहले हासिल कर लिया है। देश ने 2025 में ही स्थापित क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से पूरा कर लिया। उन्होंने भारत मंडपम में भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन में यह बात कही (PM Modi Renewable Energy Summit)।

PM Modi Renewable Energy Summit: 500 GW का लक्ष्य

शिखर सम्मेलन का विषय ‘निवेश, नवाचार, प्रेरणा’ है। इसके साथ 9वीं अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन सभा और चौथा हरित हाइड्रोजन सम्मेलन भी चल रहा है। मंत्री प्रह्लाद जोशी और श्रीपाद नाइक भी मौजूद थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की गैर-जीवाश्म क्षमता करीब 300 गीगावाट है। 2030 तक इसे 500 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके बाद अगले 10 से 11 साल में 500 गीगावाट और क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह कठिन काम है, लेकिन इसे करना ही होगा।

सोलर और हरित हाइड्रोजन पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के शीर्ष तीन सौर और नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में है। सोलर मॉड्यूल क्षमता एक दशक में 2 गीगावाट से बढ़कर करीब 200 गीगावाट हो गई है। सोलर सेल क्षमता करीब 40 से 45 गीगावाट तक पहुंच गई है।

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना फरवरी 2024 में शुरू हुई थी। इसका लक्ष्य एक करोड़ घरों तक पहुंचना है। करीब दो साल में 65 लाख से ज्यादा परिवार इससे जुड़ चुके हैं। हर छह दिन में एक लाख नए संयोजन लग रहे हैं। इससे बिजली के बिल करीब 76 प्रतिशत तक घट गए हैं।

पीएम-कुसुम योजना से 30 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ है। हर किसान को करीब एक लाख रुपये सालाना की बचत हो रही है। 44 हजार से ज्यादा सरकारी भवनों पर सोलर पैनल लगे हैं। इससे करीब 700 करोड़ रुपये सालाना की बचत हो रही है।

₹20 लाख करोड़ के निवेश अवसर

बिजनेस टुडे के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दशक में 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश हुआ है। पिछले दो साल में करीब 6 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है। दशक के अंत तक 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के अवसर मौजूद हैं।

हरित ऊर्जा गलियारे के लिए 2 लाख करोड़ रुपये के निवेश का फैसला हुआ है। हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक हर साल 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य है। अफ्रीका के लिए 200 मिलियन डॉलर की सौर सुविधा का प्रस्ताव भी दिया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है। ऊर्जा सुरक्षा ही आर्थिक सुरक्षा है। उन्होंने निवेशकों से भारत में निवेश करने का आह्वान किया। नीतियों की स्थिरता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

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