मध्यप्रदेश के Rajgarh hospital में प्रसव के कुछ घंटे बाद 19 वर्षीय प्रसूता की मौत हो गई। मृतका की पहचान अमेरपुरा निवासी अमरीबाई तंवर (पति दिनेश तंवर) के रूप में हुई है। शनिवार रात अस्पताल में भर्ती हुई अमरीबाई ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन प्रसव के बाद शुरू हुए तेज रक्तस्राव के चलते रविवार तड़के करीब 3 बजे उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों का आरोप है कि रक्तस्राव की जानकारी बार-बार देने के बावजूद नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर ने महिला को नहीं देखा। सास धापूबाई समेत परिजन रातभर मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिला। परिजनों ने प्रसव से पहले पैसे मांगे जाने का भी गंभीर आरोप लगाया है।
नर्स ने 1500, सफाईकर्मी ने 500 रुपये मांगे — परिजनों का आरोप
हंगामे के दौरान परिजनों ने दावा किया कि नर्स ने 1,500 रुपये और सफाईकर्मी ने 500 रुपये मांगे थे। उनका कहना है कि पहले बच्चे की स्थिति को लेकर उल्टी-सीधी बातें कही गईं, लेकिन पैसे देने के बाद सामान्य प्रसव करा दिया गया। परिजनों ने स्टाफ पर अपमानजनक व्यवहार का भी आरोप लगाया है।
अमरीबाई का पति दिनेश तंवर (21) मजदूरी के लिए जोधपुर जा रहा था। सामान्य प्रसव की खबर मिलने पर वह रात की बस से निकला था, लेकिन पत्नी की हालत बिगड़ने की सूचना पर उसे रास्ते से वापस बुला लिया गया।
पूर्व विधायक धरने पर बैठे, एसडीएम ने दिए जांच के आदेश
घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम निधि भारद्वाज, तहसीलदार विनीत गोयल और कोतवाली टीआई मंजू मखेनिया अस्पताल पहुंचीं। पूर्व विधायक बापूसिंह तंवर भी समर्थकों के साथ पहुंचे और परिसर में धरने पर बैठ गए। एसडीएम ने परिजनों के बयान लेने और हर स्तर पर जांच का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए। प्रसूता का पोस्टमार्टम कराया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया।
यह घटना जिला अस्पतालों में प्रसव सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इससे पहले अशोकनगर SNCU में नवजात बच्ची की हत्या का मामला भी सुर्खियों में रहा था। वहीं मोहन यादव ने मंडला में ₹36 करोड़ तेंदूपत्ता बोनस बांटा था। Nai Dunia की रिपोर्ट के मुताबिक मामले की जांच जारी है।
