पत्नी की हत्या के बाद गूगल पर खोजे सबूत मिटाने के तरीके, पति को उम्रकैद

रतलाम। मध्यप्रदेश के रतलाम जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अपराध जांच में डिजिटल सबूतों की अहमियत को फिर से साबित कर दिया है। पत्नी की गला दबाकर हत्या करने के मामले में अदालत ने आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस केस में सबसे अहम सबूत बना आरोपी की गूगल सर्च हिस्ट्री, जिसे कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया।
प्रधान सत्र न्यायाधीश नीना आशापुरे की अदालत ने ग्राम झरसंदला निवासी 23 वर्षीय राकेश गायरी पुत्र कैलाश चौधरी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 3 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जिला लोक अभियोजक सुरेश कुमार वर्मा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह फैसला मजबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर लिया गया है।
शराब को लेकर होता था पति-पत्नी में विवाद
अभियोजन पक्ष के अनुसार मृतका बुलबुल और आरोपी राकेश के बीच लंबे समय से घरेलू विवाद चल रहा था। बुलबुल, राकेश के आदतन शराब पीने और देर रात घर लौटने का विरोध करती थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच आए दिन झगड़े होते थे।
घटना वाले दिन भी विवाद बढ़ गया, जिसके बाद राकेश ने पहले बुलबुल के साथ मारपीट की और फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।
सबूत मिटाने के लिए गूगल पर की गई सर्च
हत्या के बाद राकेश ने अपने मोबाइल फोन के जरिए गूगल पर ऐसी जानकारियां खोजनी शुरू कीं, जिससे वह अपराध के सबूत मिटा सके। जांच में सामने आया कि आरोपी ने गूगल पर यह सर्च किया—
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क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने के निशान आते हैं?
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गला दबाने के निशान मिटाने के लिए कौन सी क्रीम सबसे अच्छी है?
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पोस्टमार्टम में गला फाड़ा जाता है या नहीं?
पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन की डिजिटल फॉरेंसिक जांच करवाई, जिसमें ये सभी सर्च रिकॉर्ड बरामद हुए।
कोर्ट ने माना अहम परिस्थितिजन्य साक्ष्य
न्यायालय ने इन गूगल सर्च को महत्वपूर्ण परिस्थितिजन्य साक्ष्य मानते हुए स्वीकार किया। इसके अलावा थाना बिलपांक के निरीक्षक अय्यूब खान द्वारा की गई पूछताछ में राकेश ने पत्नी की हत्या करना स्वीकार भी किया।
हालांकि इस घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था, लेकिन पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों ने एक मजबूत कड़ी बनाई। अदालत में यह भी प्रमाणित हुआ कि बुलबुल को आखिरी बार जीवित राकेश के साथ ही देखा गया था।
डिजिटल सबूत बने सजा की वजह
अदालत ने माना कि आरोपी का हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश करना उसके अपराध को और गंभीर बनाता है। मोबाइल की सर्च हिस्ट्री, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आरोपी का स्वीकारोक्ति बयान—इन सभी ने मिलकर अपराध को सिद्ध कर दिया।
न्यायालय का सख्त संदेश
इस फैसले के जरिए अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि डिजिटल गतिविधियां भी अपराध के ठोस सबूत बन सकती हैं और अपराधी तकनीक का सहारा लेकर कानून से बच नहीं सकता।





