हिमाचल प्रदेश बिजली विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पंजाब और हरियाणा अब हिमाचल प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देंगे। यह बिजली 20 साल में किस्तों में दी जाएगी। इस विवाद की जड़ भाखड़ा-नांगल और ब्यास पनबिजली परियोजनाओं में है। अदालत ने शुक्रवार 6 नवंबर को यह फैसला सुनाया।
हिमाचल प्रदेश बिजली विवाद का 60 साल पुराना इतिहास
हिमाचल प्रदेश ने 1996 में सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। उसने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत अपनी हिस्सेदारी मांगी थी। साल 2011 में अदालत ने हिमाचल की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी मान ली थी। पंजाब की हिस्सेदारी 51.80 प्रतिशत और हरियाणा की 37.51 प्रतिशत तय हुई थी। हालांकि 1966 से पहले का बकाया अब तक नहीं मिला था। इसलिए यह विवाद करीब 60 साल से चल रहा था।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने कुल बकाया 13,066 मिलियन यूनिट आंका था। इसमें से हिमाचल की पूंजीगत लागत की देनदारी करीब 420.77 करोड़ रुपये आंकी गई। इसे करीब 1,093 मिलियन यूनिट के बराबर माना गया। इसके बाद शेष बकाया 11,973 मिलियन यूनिट रह गया। यही बिजली अब पंजाब और हरियाणा 20 साल में देंगे।
11,973 MU बिजली कैसे मिलेगी
यह बिजली हर साल अक्टूबर से मार्च के बीच दी जाएगी। इस अवधि को लीन सीजन कहा जाता है। हर साल करीब 598 मिलियन यूनिट बिजली हिमाचल को मिलेगी। भाखड़ा-नांगल परियोजना की बिजली 58:42 के अनुपात में दी जाएगी। ब्यास परियोजनाओं की बिजली 60:40 के अनुपात में बंटेगी। केंद्र ने पहले 15 साल की अवधि का प्रस्ताव दिया था। हालांकि अदालत ने राज्यों का बोझ कम करने के लिए इसे 20 साल कर दिया।
इस समझौते में नकद भुगतान नहीं होगा। बिजली ही बकाए के बदले दी जाएगी। हिमाचल को पंजाब या हरियाणा को कोई भुगतान नहीं करना होगा। हालांकि हिमाचल को हर किस्त के साल का BBMB शुल्क देना होगा। पंजाब ने पहले 30 साल की अवधि मांगी थी। उधर हिमाचल ने 10 साल में भुगतान की मांग की थी।
तीन जजों की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। इसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना शामिल थे। दिल्ली में वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती भी हाल में चर्चा में रही थी। उधर चावड़ी बाजार हादसे में ठेकेदारों की गिरफ्तारी पर भी अदालत से जुड़ी कार्रवाई हुई थी। इस फैसले की विस्तृत जानकारी LiveLaw की रिपोर्ट में पढ़ी जा सकती है।
