दिल्ली-NCR में हाल की आपराधिक घटनाओं पर Supreme Court ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस J.B. Pardiwala और जस्टिस K. Vinod Chandran की बेंच ने दिल्ली पुलिस और शहर सरकार को सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के विस्तृत निर्देश दिए हैं। यह आदेश ‘In Re: Recent rape incidents in Delhi NCR’ शीर्षक वाले स्वत: संज्ञान मामले में 5 अक्टूबर को पारित हुआ था, जिसे गुरुवार को कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग सेंटरों के आसपास बीट पेट्रोलिंग तुरंत बढ़ाने का निर्देश दिया। बेंच ने कहा कि सुबह और शाम के समय, जब छात्र आते-जाते हैं, पुलिस की मौजूदगी दिखनी चाहिए और नियमित होनी चाहिए। वरिष्ठ अधिकारियों को बीट कर्मियों से नियमित मुलाकात कर स्थानीय सुरक्षा चिंताओं और अपराध के पैटर्न की समीक्षा करने को कहा गया है।
Cab और Bus ड्राइवरों का सत्यापन
कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन और ऐप आधारित कैब सेवाओं में काम करने वाले ड्राइवरों व सहायकों के सख्त सत्यापन का आदेश दिया है। इसमें सरकारी व निजी बसें, ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा के साथ Ola, Uber और Rapido से जुड़े कैब ड्राइवर भी शामिल हैं। बेंच ने कहा कि यात्रियों तक पहुंच रखने वाले परिवहन तंत्र में अपराधियों को घुसने से रोकना जरूरी है, इसलिए सिर्फ पंजीकृत और सत्यापित लोगों को ही वाहन चलाने की अनुमति हो।
कोर्ट ने बिना अनुमति चल रही शराब की दुकानों और प्रतिष्ठानों की पहचान कर कानून के मुताबिक कार्रवाई — जरूरत पड़ने पर सील करने — का भी निर्देश दिया। पुलिस पेट्रोलिंग और CCTV बुनियादी ढांचे की रियल-टाइम निगरानी के लिए समर्पित कंट्रोल रूम कमांड सेंटर यानी ‘वॉर रूम’ बनाने को कहा गया है, ताकि मिली जानकारी पर फील्ड में तुरंत कार्रवाई हो सके।
अधिकारियों पर सीधी जिम्मेदारी
सबसे अहम बात यह है कि कोर्ट ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त और मुख्य सचिव को सीधे जवाबदेह ठहराया है। बेंच ने कहा कि निर्देशों का गंभीरता से पालन न हुआ तो दोनों अधिकारी ‘व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह’ होंगे। दोनों को कंट्रोल रूम सेंटरों की मौजूदगी, संख्या और कवरेज क्षेत्र पर संयुक्त रिपोर्ट देनी होगी, साथ ही अनुपालन हलफनामा भी दाखिल करना होगा। कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली परिवहन विभाग को नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर तय की है।
इस संबंध में टाइम्स नाउ की रिपोर्ट भी पढ़ें।
