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संसद में शिवराज सिंह चौहान का बड़ा खुलासा: नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर दर्जनों योजनाएँ और संस्थान

संसद में शिवराज सिंह चौहान का बड़ा खुलासा: नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर दर्जनों योजनाएँ और संस्थान

नई दिल्ली: संसद के भीतर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने सदन को बताया कि देश में बड़ी संख्या में सरकारी योजनाएँ, शैक्षिक संस्थान, पुरस्कार, खेल ट्रॉफियां और मेडिकल संस्थान नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर हैं। शिवराज सिंह चौहान ने आंकड़ों के साथ जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह केवल नामकरण का मामला नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही एक परंपरा को दर्शाता है।

52 सरकारी योजनाएँ नेहरू-गांधी परिवार के नाम

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में कुल 52 सरकारी योजनाएँ नेहरू-गांधी परिवार से जुड़ी हुई हैं। इनमें से 25 योजनाएँ राजीव गांधी के नाम पर और 27 योजनाएँ इंदिरा गांधी के नाम पर चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर एक ही परिवार के नाम पर योजनाओं का नामकरण अपने आप में सवाल खड़े करता है।

शैक्षिक संस्थानों में भी नामों की भरमार

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में भी नेहरू-गांधी परिवार का नाम व्यापक रूप से जुड़ा है।

खेल, पुरस्कार और ट्रॉफियों में भी दबदबा

केंद्रीय कृषि मंत्री ने खेल जगत का जिक्र करते हुए बताया कि

  • 23 खेल ट्रॉफियां राजीव गांधी के नाम पर हैं

  • 4 ट्रॉफियां इंदिरा गांधी के नाम पर

  • 2 ट्रॉफियां जवाहरलाल नेहरू के नाम पर दी जाती हैं

इसके अलावा, देशभर में 74 संस्थान और 51 पुरस्कार भी नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर स्थापित किए गए हैं।

मेडिकल संस्थान, नेशनल पार्क और छात्रवृत्तियाँ

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे अहम क्षेत्रों में भी यही स्थिति देखने को मिलती है।

  • 39 मेडिकल संस्थान और अस्पताल

  • 15 राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क)

  • 15 छात्रवृत्तियाँ
    इन सभी का नामकरण नेहरू-गांधी परिवार से जुड़ा हुआ है।

हवाई अड्डे और बंदरगाह भी राजीव गांधी के नाम

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि राजीव गांधी के नाम पर देश में 5 हवाई अड्डे और बंदरगाह स्थापित हैं, जो इस परिवार के नामकरण के प्रभाव को और भी स्पष्ट करता है।

राजनीतिक मायने

शिवराज सिंह चौहान के इस बयान को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस होने के संकेत मिल रहे हैं। उनका कहना है कि देश के महापुरुषों और योगदानकर्ताओं के नाम पर भी समान रूप से संस्थानों और योजनाओं का नामकरण होना चाहिए।

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