अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को “लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026” पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया। यह विधेयक रूस और ईरान की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है।
यह कानून दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिनका जुलाई में निधन हो गया था। ग्राहम ने इस विधेयक के लिए द्विदलीय समर्थन जुटाने में अहम भूमिका निभाई थी। सदन में यह 262-159 मतों से और सीनेट में 86-11 मतों से पारित हुआ।
इस कानून की सबसे बड़ी ताकत वह अधिकार है जिससे राष्ट्रपति रूसी तेल के बड़े खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मुताबिक इसमें चीन और भारत जैसे देश शामिल हैं, जो रूसी ऊर्जा के प्रमुख ग्राहक हैं। मकसद रूस के सैन्य खर्च के राजस्व स्रोतों को सुखाना है।
कानून के तहत ईरान पर भी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया गया है, खासकर उसके हथियार और ऊर्जा क्षेत्रों पर। सदन में इस विधेयक को टेक्सास के प्रतिनिधि माइकल मैककॉल ने पेश किया था। उनका कहना है कि इसका लक्ष्य रूस की युद्ध मशीन को पंगु बनाना और राष्ट्रपति पुतिन पर शांति वार्ता के लिए दबाव बढ़ाना है।
यूक्रेन के वाशिंगटन स्थित प्रभारी राजदूत डेनिस सिएनिक ने इस कदम को “शक्तिशाली कदम” बताते हुए इसका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह यूक्रेन में स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे लोगों का मनोबल बढ़ाएगा।
हालांकि कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति को मिली व्यापक टैरिफ शक्तियों पर चिंता जताई है। उन्हें आशंका है कि इन शक्तियों का दुरुपयोग हो सकता है। बावजूद इसके विधेयक को दोनों दलों का समर्थन मिला।
यह कानून ऐसे समय आया है जब अमेरिका रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ा रहा है, जो 2022 से जारी है। बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इन नई शक्तियों का इस्तेमाल करेगा या नहीं, लेकिन भारत, चीन और अमेरिका के सहयोगी तुर्की पर नए शुल्क लगने का खतरा पैदा हो गया है।
गौरतलब है कि इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील का ऐलान किया है, जिसमें भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताई है।

