गुरुवार को UGC Regulations 2026 पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने कहा कि वह नियमों की समीक्षा के लिए कमेटी बनाने पर विचार कर रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को यह जानकारी दी। इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई चार हफ्ते के लिए टाल दी। नियमों को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस भी जारी है।
UGC Regulations 2026 पर विवाद क्या है
यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को ये नियम जारी किए थे। इन नियमों ने 2012 के पुराने ढांचे की जगह ली थी। नियमों का मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकना है। हालांकि नियमों की परिभाषा और शिकायत व्यवस्था पर सवाल उठे।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सामान्य वर्ग के छात्र शिकायत नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को नियमों पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि कुछ प्रावधान अस्पष्ट लगते हैं। मामला Abeda Salim Tadvi बनाम भारत संघ से जुड़ा है।
कोर्ट में केंद्र ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई की। मेहता ने कहा कि सरकार हर छात्र के हितों का ध्यान रख रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी वर्ग असंतुष्ट या चिंतित महसूस नहीं करे। सरकार कमेटी बनाने पर विचार कर रही है।
कोर्ट ने भी हर छात्र के हितों की रक्षा पर जोर दिया। अगस्त 2026 में भी केंद्र ने कहा था कि नियमों पर फिर से विचार हो रहा है।
आगे क्या, छात्रों पर असर
नियमों के तहत विश्वविद्यालयों को समान अवसर केंद्र बनाने हैं। हर संस्थान में इक्विटी कमेटी भी बनानी है। ये कमेटियां भेदभाव की शिकायतों की जांच करेंगी। हालांकि नियमों पर रोक के कारण 2012 के नियम ही लागू हैं।
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार कमेटी की रूपरेखा अभी तय नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे का नियम भी गुरुवार को ही सुनाया था। संसद में Amit Shah ने Rahul Gandhi को बहस की चुनौती दी थी।
