उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर रोक, CBI की दलीलें स्वीकार

Unnao Rape Case News: उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराए गए पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर रोक लगा दी है। केंद्र सरकार और CBI की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और इसमें दी गई राहत की न्यायिक समीक्षा आवश्यक है। अदालत ने कहा कि वह हाईकोर्ट द्वारा जमानत देने के आदेश को फिलहाल स्थगित करने के पक्ष में है। इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है।
CBI और केंद्र सरकार की सख्त आपत्ति
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि पीड़िता की उम्र घटना के समय 16 वर्ष से भी कम थी, इसलिए यह मामला केवल IPC की धारा 376 तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें POCSO एक्ट के कठोर प्रावधान भी लागू होते हैं।
तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि IPC की धारा 376(2) के तहत इस तरह के अपराध में न्यूनतम 20 साल की सजा और अधिकतम आजीवन कारावास या जैविक जीवन के अंत तक जेल का प्रावधान है। ऐसे गंभीर अपराध में केवल सजा की अवधि के आधार पर जमानत देना गलत नजीर बन सकता है।
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर उठे सवाल
दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत देते हुए उनकी सजा को निलंबित कर दिया था। हाईकोर्ट का तर्क था कि सेंगर सात वर्षों से अधिक समय से जेल में हैं और उनकी अपील की सुनवाई में लगातार देरी हो रही है, जो उनके मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया था कि सेंगर के खिलाफ पीड़िता के पिता की हत्या का मामला अभी भी लंबित है। इसी बिंदु को आधार बनाते हुए CBI और केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट में तेज हुई सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत सुनवाई शुरू की। अदालत ने कहा कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि द्वारा किए गए ऐसे जघन्य अपराध में दी गई राहत न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर सकती है। अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश न्यायिक मानकों के अनुरूप था या नहीं।
क्या है उन्नाव रेप केस?
उन्नाव रेप केस वर्ष 2017 में सामने आया था, जब उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की एक नाबालिग लड़की ने तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया था। इसके बाद पीड़िता के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वर्ष 2019 में पीड़िता एक भीषण सड़क हादसे का शिकार हुई, जिसमें दो लोगों की जान चली गई।
लंबी सुनवाई के बाद दिसंबर 2019 में अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर इस संवेदनशील मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।





