आज संसद में पेश होगा VB-G Ram G Bill: गांवों की अर्थव्यवस्था को लगेंगे पंख, विकसित भारत की नींव होगी मजबूत
आज संसद में पेश होगा VB-G Ram G Bill: गांवों की अर्थव्यवस्था को लगेंगे पंख, विकसित भारत की नींव होगी मजबूत

सरकार आज संसद में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G Ram G Bill पेश करने जा रही है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान इस महत्वपूर्ण विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत करेंगे। यह नया कानून करीब 20 साल पुरानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह लेगा और ग्रामीण भारत के लिए रोजगार, आजीविका और बुनियादी ढांचे का एक नया, मजबूत और आधुनिक मॉडल तैयार करेगा।
क्या है VB-G Ram G Bill और क्यों है अहम
VB-G Ram G Bill के तहत ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को साल में 125 दिनों के अकुशल रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाएगी। सरकार का कहना है कि यह कानून सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
नई योजना के तहत बनने वाली ग्रामीण परिसंपत्तियों को नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक में दर्ज किया जाएगा। इससे देशभर में ग्रामीण अवसंरचना से जुड़ा डेटा एक जगह उपलब्ध होगा और विकास की योजनाएं ज्यादा समन्वित और प्रभावी ढंग से बनाई जा सकेंगी।
मनरेगा को बदलने की जरूरत क्यों पड़ी
मनरेगा की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी, जब ग्रामीण भारत की सामाजिक-आर्थिक स्थिति आज से बिल्कुल अलग थी। बीते दो दशकों में गांवों में बड़ा बदलाव आया है। गरीबी दर वर्ष 2011-12 में 25.7% से घटकर 2023-24 में सिर्फ 4.86% रह गई है। डिजिटल कनेक्टिविटी, बैंकिंग पहुंच, सड़कें, बिजली और आजीविका के साधन पहले से कहीं बेहतर हुए हैं।
सरकार के अनुसार, मौजूदा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मनरेगा का अनियंत्रित और पूरी तरह मांग आधारित मॉडल अब प्रभावी नहीं रह गया था। इसलिए एक ऐसे ढांचे की जरूरत थी, जो तेज, टिकाऊ और समावेशी विकास को आगे बढ़ा सके।
मानक वित्तपोषण से आएगा अनुशासन
VB-G Ram G Bill में मानक वित्तपोषण (Standard Financing) का प्रावधान किया गया है। इससे योजना का बजट ज्यादा अनुशासित, पारदर्शी और पूर्वानुमेय होगा। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर जिम्मेदारी साझा करेंगी। यदि तय समय में काम नहीं दिया गया, तो बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा, यानी रोजगार की कानूनी गारंटी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
मनरेगा में सुधार हुए, फिर भी क्यों बदलाव जरूरी था
पिछले वर्षों में मनरेगा में कई सुधार हुए। महिलाओं की भागीदारी 48% से बढ़कर 56.74% हुई, आधार-सीडेड मजदूरों की संख्या 12 करोड़ से अधिक हो गई और ई-भुगतान लगभग 100% तक पहुंच गया। बावजूद इसके, दुरुपयोग, फर्जी हाजिरी और डिजिटल सिस्टम को चकमा देने जैसी समस्याएं बनी रहीं।





