वीर बाल दिवस: दीवारों में चुनवा दिए गए पर धर्म नहीं छोड़ा, मुगल क्रूरता के आगे नहीं झुके वीर बालक, गुरु जी के साहिबजादों की शहादत की अमर गाथा

हर साल 26 दिसंबर का दिन भारतीय इतिहास में साहस, आस्था और बलिदान की अद्वितीय मिसाल के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सिखों के दसवें गुरु, साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों—बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी—की शहादत को समर्पित है। मात्र 6 और 8 वर्ष की कोमल उम्र में इन वीर बालकों ने मुगल सत्ता की क्रूरता के आगे झुकने से इनकार कर दिया और धर्म की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। आज पूरा देश श्रद्धा और सम्मान के साथ इस दिन को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मना रहा है।
🔱 वीर बाल दिवस: जब बचपन ने वीरता की परिभाषा लिखी
वीर बाल दिवस भारतीय इतिहास के उस अध्याय की याद दिलाता है, जहां उम्र नहीं बल्कि संकल्प ने महानता को परिभाषित किया। गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों ने यह सिद्ध कर दिया कि सत्य, धर्म और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए साहस किसी आयु का मोहताज नहीं होता। मुगल शासकों द्वारा बार-बार धर्म परिवर्तन के दबाव और लालच के बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
📜 सिख इतिहास का वह दौर जब अत्याचार चरम पर था
सन् 1705 का समय सिख इतिहास का सबसे कठिन दौर माना जाता है। मुगल शासक औरंगजेब की नीतियों के चलते पूरे उत्तर भारत में अत्याचार फैला हुआ था। आनंदपुर साहिब पर मुगल सेना के हमले के बाद, सिखों के आग्रह पर गुरु गोबिंद सिंह जी को परिवार सहित किला छोड़ना पड़ा। इसी दौरान उफनती सरसा नदी के किनारे गुरु जी का परिवार बिछड़ गया।
⚔️ एक ओर युद्ध, दूसरी ओर विश्वासघात
एक तरफ गुरु गोबिंद सिंह जी अपने दो बड़े साहिबजादों—साहिबजादा अजीत सिंह और साहिबजादा जुझार सिंह—के साथ चमकौर की जंग की ओर बढ़े, तो दूसरी ओर माता गुजरी जी और दो छोटे साहिबजादे, जोरावर सिंह और फतेह सिंह, गुरु जी के पुराने सेवक गंगू के साथ रह गए। लेकिन गंगू ने लालच में आकर विश्वासघात किया और उन्हें मुगल अधिकारियों के हवाले कर दिया।
🏰 सरहिंद का ठंडा बुर्ज और अमानवीय यातनाएं
दोनों छोटे साहिबजादों और माता गुजरी जी को सरहिंद ले जाया गया और वहां के ठंडे बुर्ज में कैद कर दिया गया। कड़ाके की सर्दी, न तन ढकने को कपड़े और न बिछाने को बिस्तर—लेकिन इन मासूमों के हौसले अडिग रहे। उनके भीतर गुरु गोबिंद सिंह जी की शिक्षाएं और खालसा पंथ की आत्मा जीवित थी।
🕊️ धर्म परिवर्तन का प्रस्ताव और वीरों का इनकार
26 दिसंबर 1705 को साहिबजादों को सरहिंद के सूबेदार वजीर खान की कचहरी में पेश किया गया। उन्हें इस्लाम स्वीकार करने के बदले धन, सत्ता और ऐशो-आराम का लालच दिया गया। साथ ही डराया-धमकाया भी गया। लेकिन साहिबजादों ने निर्भीक स्वर में कहा—
“हम उस गुरु के पुत्र हैं जिसने अन्याय के आगे झुकना नहीं, बल्कि मर मिटना सिखाया है। हम अपना धर्म कभी नहीं छोड़ेंगे।”
🧱 जिंदा दीवार में चुनवाने का क्रूर आदेश
साहिबजादों की इस अडिग आस्था ने वजीर खान को क्रोधित कर दिया। उसने अमानवीय आदेश दिया कि दोनों मासूमों को जिंदा दीवार में चुनवा दिया जाए। इतिहास गवाह है कि जब ईंटें एक-एक कर उनके शरीर के चारों ओर रखी जा रही थीं, तब भी उनके चेहरे पर भय नहीं, बल्कि अद्भुत शांति और तेज था। अंततः धर्म और मानवता की रक्षा के लिए उन्होंने उसी दीवार के भीतर अपने प्राण त्याग दिए।
🌺 माता गुजरी जी का बलिदान
अपने पोतों की शहादत का समाचार सुनते ही माता गुजरी जी भी इस आघात को सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने भी उसी ठंडे बुर्ज में अपने प्राण त्याग दिए। यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे सिख समाज और भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी शहादतों में से एक थी।
⚔️ गुरु गोबिंद सिंह जी का अपार बलिदान
गुरु गोबिंद सिंह जी ने देश और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। चमकौर की जंग में उनके दोनों बड़े साहिबजादे भी शहीद हुए। चारों पुत्रों की शहादत के बावजूद गुरु जी ने कभी अधर्म के आगे घुटने नहीं टेके। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का अमर संदेश दिया।
🇮🇳 वीर बाल दिवस की घोषणा
9 जनवरी 2022 को गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि हर साल 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को साहिबजादों की बहादुरी, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति से प्रेरित करना है।
🎓 देशभर में आयोजन और प्रेरणा
आज वीर बाल दिवस के अवसर पर देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में कथा वाचन, निबंध प्रतियोगिता, नाटक और संगोष्ठियों का आयोजन किया जाता है। बच्चों को बताया जाता है कि कैसे साहिबजादों ने विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. वीर बाल दिवस कब मनाया जाता है?
हर साल 26 दिसंबर को।
2. साहिबजादों की उम्र कितनी थी?
बाबा जोरावर सिंह – 8 वर्ष, बाबा फतेह सिंह – 6 वर्ष।
3. वीर बाल दिवस की शुरुआत कब हुई?
2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद।
4. साहिबजादों को शहादत कहां मिली?
सरहिंद (वर्तमान फतेहगढ़ साहिब, पंजाब)।
5. वीर बाल दिवस का संदेश क्या है?
सत्य, धर्म और मूल्यों के लिए हर परिस्थिति में अडिग रहना।




