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एबी रोड एलिवेटेड कॉरिडोर: लागत 600 करोड़ पार, उपयोगिता पर सवाल

एबी रोड एलिवेटेड कॉरिडोर पर बढ़ा विवाद, लागत और उपयोगिता चर्चा में

एबी रोड एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर इंदौर में बहस तेज हो गई है। एबी रोड एलिवेटेड कॉरिडोर की अनुमानित लागत अब 600 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। दरअसल यह परियोजना पहले 250 करोड़ रुपए में प्रस्तावित थी।

चार्टर्ड इंजीनियर अतुल शेठ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी व्यवहारिकता पर सवाल उठाए। वहीं उन्होंने स्वतंत्र तकनीकी समिति से पुनः परीक्षण की मांग की। हालांकि प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।


एबी रोड एलिवेटेड कॉरिडोर की पृष्ठभूमि

पुराना आगरा–मुंबई मार्ग, जिसे आज ए.बी. रोड कहा जाता है, वर्ष 2000 में बायपास बनने के बाद शहर के भीतर का प्रमुख मार्ग बन गया।

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यहां एलिवेटेड कॉरिडोर की घोषणा की थी। उस समय इसकी अनुमानित लागत 250 करोड़ रुपए बताई गई थी।

  • घोषित वर्ष: 2018

  • प्रारंभिक लागत: 250 करोड़

  • प्रस्तावित लंबाई: 6.5 किलोमीटर

यह आंकड़ा अब बदलता दिख रहा है।


उपयोगिता पर एबी रोड एलिवेटेड कॉरिडोर सवालों में

अतुल शेठ का कहना है कि एलिवेटेड ढांचा सामान्यतः उन राजमार्गों पर कारगर होता है जहां यातायात बिना रुकावट चलता है।

हालांकि एबी रोड के इस हिस्से में आठ प्रमुख चौराहे और 15 से अधिक आंतरिक मार्ग जुड़ते हैं। इसलिए शुरुआत से अंत तक निर्बाध यातायात संभव नहीं है।

वर्ष 2024 के एक सर्वे में इसकी उपयोगिता लगभग 2 प्रतिशत बताई गई। बाद में रैम्प जोड़ने के बाद भी उपयोगिता 10 प्रतिशत से अधिक नहीं आंकी गई।

  • प्रारंभिक उपयोगिता: 2%

  • संशोधित प्रस्ताव उपयोगिता: 10%

  • चौराहा सुधार दक्षता दावा: 42%

अब सवाल यह है कि क्या चरणबद्ध चौराहा सुधार बेहतर विकल्प हो सकता है।

इससे पहले… शहर में अन्य ट्रैफिक प्रोजेक्ट पर भी तकनीकी समीक्षा की मांग उठी थी।
इस मामले में विस्तृत अपडेट देखें… हमारे शहरी विकास सेक्शन में।


लागत बढ़ोतरी और निर्माण की आशंका

एबी रोड एलिवेटेड कॉरिडोर की लागत 2020 के अनुमान से काफी बढ़ चुकी है। दरअसल संशोधित स्वरूप में यह 600 करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच सकती है।

इसके अलावा भूमिगत जलापूर्ति, सीवरेज और ड्रेनेज लाइनों के स्थानांतरण पर स्पष्ट विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं है।

विशेषज्ञों का दावा है कि यदि निर्माण शुरू होता है तो 5 से 7 वर्षों तक शहर के सबसे व्यस्त मार्ग पर जाम की स्थिति बन सकती है।

  • संभावित निर्माण अवधि: 5–7 वर्ष

  • प्रभावित मार्ग: ए.बी. रोड

  • लागत वृद्धि: 250 करोड़ से 600+ करोड़

दूसरी ओर शहर को दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।


आगे क्या होगा

इसी बीच स्वतंत्र तकनीकी समिति से दोबारा परीक्षण की मांग उठी है। विशेषज्ञों का मत है कि किसी भी बड़े ढांचे से पहले ट्रैफिक पैटर्न का वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी है।

हालांकि अंतिम निर्णय शासन स्तर पर होगा। साथ ही यह भी देखना होगा कि शहर को दृश्यात्मक परियोजना चाहिए या वास्तविक यातायात राहत।

स्रोत: इंदौर विकास प्राधिकरण आधिकारिक वेबसाइट

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