राम राज्य की गौरवगाथा और मानसिक स्वतंत्रता का संदेश, राम मंदिर ध्वजारोहण में पीएम मोदी का भाषण
राम राज्य की गौरवगाथा और मानसिक स्वतंत्रता का संदेश, राम मंदिर ध्वजारोहण में पीएम मोदी का भाषण
अयोध्या में राम मंदिर में आयोजित धर्मध्वजा फहराने की भव्य योजना के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष भाषण दिया, जिसमें उन्होंने राम राज्य की गौरवगाथा, विकसित भारत की दिशा और मानसिक गुलामी से मुक्ति का संदेश दिया। यह कार्यक्रम ऐतिहासिक और भावनात्मक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह मंदिर निर्माण के 673 दिनों बाद हुआ, जिसे करोड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साह और श्रद्धा के साथ देखा।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत राम राज्य के आदर्शों और उनके गौरवपूर्ण इतिहास से की। उन्होंने कहा कि राम राज्य केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि नैतिकता, न्याय और समाज के उत्थान का प्रतीक भी है। पीएम ने कहा कि राम राज्य की गाथा हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जिसमें सत्य, धर्म और नैतिक मूल्यों की विजय का संदेश निहित है।
भाषण में पीएम मोदी ने विकसित भारत और आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज का भारत राम राज्य की संस्कृति से प्रेरणा लेकर तकनीक, विज्ञान और आर्थिक विकास के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि आधुनिक भारत के निर्माण में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है और देश की तरक्की में युवा शक्ति का योगदान अनिवार्य है।
प्रधानमंत्री ने मानसिक गुलामी से मुक्ति पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आज भी कई लोग मानसिक रूप से पुराने भ्रमों और भय में बंधे हुए हैं। उन्होंने प्रेरित किया कि भारतवासियों को स्वतंत्र सोच, आत्मनिर्भर दृष्टिकोण और सकारात्मक मानसिकता अपनानी होगी। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि मानसिक गुलामी से मुक्ति ही सच्ची स्वतंत्रता की दिशा में पहला कदम है।

इस अवसर पर मंदिर परिसर को 1000 क्विंटल फूलों से सजाया गया और पीएम मोदी ने भव्य रोड शो के दौरान श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया। कार्यक्रम में छात्रों, युवा समूहों और भक्तों की भारी उपस्थिति रही। बच्चों और युवाओं द्वारा फूलों की वर्षा कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रही थी।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अंत में यह भी आश्वासन दिया कि राम मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और एकता का प्रतीक बनेगा। उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे देश के नैतिक मूल्यों और गौरवशाली इतिहास को आगे बढ़ाने में योगदान दें।
इस ऐतिहासिक अवसर ने न केवल अयोध्या बल्कि पूरे देश में उत्साह और गर्व का माहौल बना दिया। राम मंदिर की धर्मध्वजा फहराने की यह परंपरा हर भारतीय के लिए प्रेरणा और श्रद्धा का प्रतीक बनी।



