इंदौर की महिला थाना पुलिस ने मंदसौर के ज्वाइंट कलेक्टर राहुल चौहान के खिलाफ दहेज प्रताड़ना समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। चौहान की पत्नी निर्मला चौहान ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उन्हें पति द्वारा दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया गया और उनके पति की ऊंची पदस्थापना के कारण प्रशासन में शिकायत दर्ज कराना भी चुनौतीपूर्ण रहा।
निर्मला चौहान ने बताया कि उनकी शादी 16 दिसंबर 2018 को हुई थी, उस समय राहुल चौहान ट्रेनी डिप्टी कलेक्टर थे। शादी के तुरंत बाद ही उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। निर्मला का आरोप है कि राहुल चौहान ने योजनाबद्ध तरीके से उनका अबॉर्शन करवाया और लगातार धमकियां दीं।
अल्ग-अलग आरोप और घटनाएं
पीड़िता का कहना है कि 31 जुलाई 2019 को उन्हें पति ने मारपीट कर मायके छोड़ने और तलाक देने की धमकी दी। निर्मला ने कई बार अपने अधिकारों के लिए खरगोन थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन प्रशासनिक दबाव और पति की पदस्थापना के कारण उनकी आवाज़ दबती रही। इस बीच उन्होंने परामर्श केंद्रों में भी मदद लेने की कोशिश की, लेकिन पति ने हर बार सहयोग से इनकार कर दिया।
निर्मला के अनुसार, इस मामले में पति द्वारा की गई प्रताड़ना और धमकियों का असर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ा। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पति ने शादी के दौरान और उसके बाद कई मौकों पर उन्हें डराने और नियंत्रित करने की कोशिश की।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय
यह मामला हाई-प्रोफाइल होने के कारण प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ज्वाइंट कलेक्टर जैसे वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला उठना प्रशासन और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है। अधिकारियों का कहना है कि कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होता है और मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
कानूनी प्रक्रिया और अगली कार्रवाई
इंदौर महिला थाना पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शिकायत में दहेज प्रताड़ना, शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न, धमकी और अबॉर्शन करवाने जैसी धाराओं का उल्लेख किया गया है। अब पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए सबूत इकट्ठा करने और आरोपी को नोटिस देने की प्रक्रिया में है।
इस तरह के मामले समाज में महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा के महत्व को उजागर करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी पद पर बैठे अधिकारी भी कानून के दायरे से बाहर नहीं हैं और किसी भी प्रकार के उत्पीड़न पर कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है।

