उज्जैन की गलियों में बच्चों संग क्रिकेट खेलते दिखे वर्ल्ड कप हीरो कपिल देव, सादगी और अपनापन जीत ले गया दिल

उज्जैन। भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े नायकों में शुमार और वर्ष 1983 में देश को पहला वर्ल्ड कप दिलाने वाले महान क्रिकेटर कपिल देव मंगलवार को कुछ समय के लिए उज्जैन पहुंचे। यह दौरा न किसी आधिकारिक कार्यक्रम का हिस्सा था और न ही किसी विशेष प्रोटोकॉल के तहत। कपिल देव पूरी तरह सामान्य अंदाज में अपने पुराने मित्र से मिलने उज्जैन आए और इसी सादगी ने एक बार फिर लोगों का दिल जीत लिया।
कपिल देव अपने पारिवारिक मित्र मोहनलाल सोनी और सरला सोनी के निवास पर पहुंचे। यहां उनका स्वागत बेहद आत्मीयता के साथ किया गया। खास बात यह रही कि इस दौरान न तो किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था दिखी और न ही किसी प्रकार की औपचारिकता। उज्जैन प्रवास के दौरान कपिल देव ने आम लोगों के बीच रहना पसंद किया।
फ्रीगंज क्षेत्र में उस वक्त हर कोई हैरान रह गया, जब लोगों ने देखा कि भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी सड़क पर बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं। एक गली में बच्चों के साथ बल्लेबाजी करते कपिल देव का दृश्य देखते ही बनता था। बच्चों के लिए यह पल किसी सपने से कम नहीं था। उनके साथ खेलकर बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।
राह चलते लोग जब यह समझ पाए कि बच्चों के साथ खेल रहा यह शख्स कोई और नहीं बल्कि 1983 वर्ल्ड कप विजेता कप्तान कपिल देव हैं, तो वे भी रुककर इस दृश्य को देखने लगे। हर किसी ने कपिल देव की सादगी, विनम्रता और जमीन से जुड़े स्वभाव की सराहना की।
उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने भी कपिल देव से सौजन्य मुलाकात की। दोनों के बीच आत्मीय बातचीत हुई। कपिल देव का महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने का भी मन था, लेकिन मंदिर परिसर में अधिक भीड़ होने के कारण वे दर्शन नहीं कर सके। हालांकि, उन्होंने महाकाल के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
मोहनलाल सोनी ने बताया कि कपिल देव का उज्जैन से पुराना लगाव है और वे उनके पारिवारिक मित्र हैं। उन्होंने कहा कि कपिल देव को उज्जैन आकर सुखद शांति और आत्मिक सुकून का अनुभव हुआ। शहर की सरलता और लोगों का अपनापन उन्हें हमेशा आकर्षित करता है।
कुल मिलाकर, कपिल देव का यह छोटा सा उज्जैन दौरा यादगार बन गया। बिना किसी दिखावे के, बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते हुए एक महान खिलाड़ी का यह रूप लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस गया।

