Project Cheeta MP: कूनो में खुले जंगल में पहुंचे 2 मादा चीते, देश में संख्या 57 हुई
Project Cheeta MP के तहत Kuno National Park में सोमवार को बड़ा कदम उठाया गया। यहां दो मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ दिया गया। इसके बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हो गई।
कार्यक्रम में Mohan Yadav भी मौजूद रहे। उन्होंने कूनो नेशनल पार्क का दौरा किया और चीतों को बाड़े से मुक्त किया।
Project Cheeta MP पर CM मोहन यादव का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि Project Cheeta MP लगातार सफलता की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब “चीता स्टेट” के रूप में नई पहचान बना रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में शुरू हुई यह परियोजना अब मजबूत इको-सिस्टम तैयार कर रही है।
इसके अलावा उन्होंने वन विभाग, मेडिकल टीम और स्थानीय लोगों की भी सराहना की।
अब 57 हुई देश में चीतों की संख्या
वन विभाग के अनुसार देश में अब कुल 57 चीते हैं।
इनमें:
- 54 चीते कूनो नेशनल पार्क में हैं
- 3 चीते गांधी सागर अभ्यारण्य में मौजूद हैं
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में और चीतों को भी खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।
बोत्सवाना से लाए गए थे नए चीते
इसी साल फरवरी में बोत्सवाना से 9 नए चीते भारत लाए गए थे।
इनमें:
- 6 मादा चीते
- 3 नर चीते
शुरुआत में सभी चीतों को क्वारंटीन में रखा गया। इसके बाद उन्हें छोटे बाड़ों में शिफ्ट किया गया।
अब इन्हीं में से 2 मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ा गया है। इससे Project Cheeta MP को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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Project Cheeta MP से बढ़ेगी जेनेटिक विविधता
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बोत्सवाना से आए चीते बेहतर जेनेटिक विविधता लेकर आए हैं।
इससे कूनो में चीतों की स्वस्थ आबादी विकसित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही भविष्य में प्रजनन की संभावना भी मजबूत होगी।
वन विभाग अब गांधी सागर और नौरादेही जैसे अभ्यारण्यों में भी चीतों को बसाने की तैयारी कर रहा है।
2022 में शुरू हुआ था Project Cheeta MP
भारत में चीतों की वापसी की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी। उस समय नामीबिया से 8 चीते कूनो लाए गए थे।
इसके बाद 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते भारत पहुंचे। वहीं हाल ही में बोत्सवाना से नए चीते लाए गए हैं।
बता दें कि Project Cheeta MP का उद्देश्य देश में विलुप्त हो चुकी चीता प्रजाति को फिर से बसाना है।
Official Source: Madhya Pradesh Forest Department

