Piwdaya Kawad Yatra: श्रद्धा से शामिल हुईं लाडली बहनें

Dainik R Times
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Piwdaya Kawad Yatra

पीवड़ाय में लाडली बहना कावड़ यात्रा, श्रद्धा से शामिल हुए लोग

Piwdaya Kawad Yatra में ग्राम पीवड़ाय की लाडली बहनें और युवा शामिल हुए। यात्रा में बुजुर्गों ने भी उत्साह दिखाया। आयोजन में धार्मिक श्रद्धा के साथ सामाजिक सहभागिता का संदेश दिखाई दिया।

Piwdaya Kawad Yatra में दिखा उत्साह

इसके अलावा, ग्राम पीवड़ाय में पिछले पांच वर्षों से यह यात्रा आयोजित होने की जानकारी दी गई है। सरपंच श्रीमती रचना माखन गोखले के नेतृत्व में आयोजन होता है। वहीं, स्थानीय युवाओं की भूमिका भी अहम बताई गई है।

यात्रा में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल होते हैं। साथ ही, श्रद्धालु यात्रा के दौरान धार्मिक उत्साह दिखाते हैं। आयोजन को लेकर स्थानीय स्तर पर उत्साह का माहौल रहता है।

नर्मदा-शिप्रा संगम से शुरू हुई यात्रा

इसी दौरान, यात्रा नर्मदा–शिप्रा संगम से शुरू होने की जानकारी दी गई। इसके बाद यात्रा पिपलेश्वर महादेव मंदिर की ओर बढ़ती है। यात्रा का समापन बाजार चौक पीवड़ाय में बताया गया है।

इसके अलावा, आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी का दावा किया गया है। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में प्रतिभागियों की आधिकारिक संख्या नहीं दी गई है। इसलिए वास्तविक संख्या की पुष्टि आयोजकों या प्रशासन से की जानी चाहिए।

जनप्रतिनिधियों की भी रही सहभागिता

वहीं, आयोजन में कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट के शामिल होने की जानकारी दी गई है। जनपद अध्यक्ष विश्वजीत सिसोदिया भी यात्रा में शामिल बताए गए हैं। जिला पंचायत सदस्य ब्रजमोहन राठी का नाम भी सामग्री में दिया गया है।

साथ ही, सोमेश्वरजी पटेल, रवि दुबे और मिश्री पनोड़िया सहित अन्य स्थानीय नेताओं के शामिल होने की बात कही गई है। इन सहभागियों की भूमिका आयोजन में उपस्थिति तक सीमित बताई गई है।

युवाओं के सहयोग से आयोजन को मिला विस्तार

इसके बाद, ग्राम पीवड़ाय के युवाओं ने आयोजन में सहयोग किया। युवाओं ने सेवा और व्यवस्थाओं में योगदान दिया। इसी वजह से यात्रा को सामुदायिक भागीदारी का स्वरूप मिला।

धार्मिक आयोजन में महिलाओं की भागीदारी भी प्रमुख रही। वहीं, युवाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी ने इसे सामूहिक आयोजन बनाया। Piwdaya Kawad Yatra इसी सामाजिक सहभागिता के कारण स्थानीय स्तर पर चर्चा में रहती है।

आस्था और सामाजिक सहभागिता का संदेश

अंततः, यात्रा को आस्था और सामाजिक एकता से जुड़ा आयोजन बताया गया है। साथ ही, इसमें अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी दिखाई देती है। आयोजन की परंपरा आगे भी जारी रहने की उम्मीद जताई गई है।

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