MYH sickle cell screening: जन्म के साथ होगी जांच

Dainik R Times
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MYH sickle cell screening

एमवायएच में जन्म के साथ होगी सिकल सेल की स्क्रीनिंग, केंद्र से मदद का आश्वासन

इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में सिकल सेल बीमारी की शुरुआती पहचान को लेकर नई पहल की तैयारी है। MYH sickle cell screening के तहत जन्म के समय नवजातों की जांच शुरू करने की योजना है। इसके लिए केंद्र सरकार की टीम ने सेंटर का निरीक्षण किया है। साथ ही, वित्तीय सहायता और जरूरी उपकरण देने का आश्वासन मिला है।

MYH sickle cell screening में क्या नई सुविधा शुरू होगी?

इसके अलावा, एमवायएच स्थित सिकल सेल सेंटर में Newborn Screening शुरू करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य नवजात स्तर पर बीमारी की पहचान करना है। जांच के जरिए शुरुआती स्थिति में बीमारी का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

वहीं, इसके लिए केंद्र सरकार की टीम ने सेंटर की सुविधाओं का निरीक्षण किया। सेंटर की मौजूदा कार्यप्रणाली की भी जानकारी ली गई। साथ ही, जरूरी संसाधनों को लेकर चर्चा हुई।

इसके बाद, केंद्र से वित्तीय सहायता और उपकरण उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला है। हालांकि, सुविधा शुरू होने की अंतिम तारीख अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल प्रस्तावित नई व्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए।

MYH sickle cell screening से किन बच्चों को फायदा हो सकता है?

साथ ही, जन्म के समय जांच से बीमारी की शुरुआती पहचान संभव हो सकेगी। इससे लक्षणों के स्पष्ट होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वहीं, प्रभावित बच्चों को समय पर चिकित्सकीय सलाह मिलने में मदद हो सकती है।

मध्यप्रदेश के आदिवासी और सिकल सेल प्रभावित क्षेत्रों में इसका महत्व अधिक हो सकता है। इन क्षेत्रों से मरीज इलाज के लिए एमवायएच पहुंचते हैं। इसलिए शुरुआती जांच व्यवस्था से रेफरल और उपचार प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, परिवारों को बीमारी की स्थिति समझने में भी सहायता मिल सकती है। हालांकि, जांच के बाद आगे की चिकित्सा प्रक्रिया डॉक्टरों की सलाह पर निर्भर करेगी।

एमवायएच में कितने सिकल सेल मरीज पंजीकृत हैं?

वहीं, एमवायएच में वर्तमान में सिकल सेल एनीमिया के करीब 1400 मरीज पंजीकृत बताए गए हैं। इन मरीजों को उपचार और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह आंकड़ा सेंटर पर आने वाले मरीजों की संख्या को दर्शाता है।

साथ ही, सेंटर में अन्य सुविधाएं विकसित करने की तैयारी भी चल रही है। इनमें HLA Typing सुविधा शामिल है। इसके लिए संशोधित प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है।

इसके बाद, प्रस्ताव में उपकरण, रिएजेंट्स और अन्य जरूरी संसाधनों की मांग शामिल होगी। सुविधा विकसित होने पर मरीजों की जांच से जुड़ी क्षमताएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, इसके लिए प्रस्ताव की स्वीकृति और संसाधनों की उपलब्धता जरूरी होगी।

Red Cell Exchange की सुविधा क्यों महत्वपूर्ण है?

इसके अलावा, एमवायएच के सेंटर में Red Cell Exchange की सुविधा भी उपलब्ध है। यह सुविधा देश के चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों में होने की जानकारी दी गई है। गंभीर स्थिति वाले मरीज यहां दूसरे राज्यों से भी रेफर होकर पहुंचते हैं।

इसी दौरान, आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भी यहां उपचार मिलता है। ऐसे में सेंटर की सुविधाओं का विस्तार क्षेत्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण हो सकता है। MYH sickle cell screening इसी विस्तार की एक प्रस्तावित पहल है।

वहीं, Newborn Screening और HLA Typing जैसी सुविधाओं के विकास से सेंटर की जांच क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

आदिवासी जिलों में सिकल सेल का कितना प्रभाव है?

साथ ही, उपलब्ध जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में सिकल सेल से प्रभावित करीब 75 प्रतिशत मरीज पांच आदिवासी जिलों में केंद्रित हैं। इनमें अलीराजपुर, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, झाबुआ और डिंडौरी शामिल हैं।

इसलिए जन्म के समय जांच की सुविधा इन क्षेत्रों के बच्चों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। शुरुआती पहचान से परिवारों को समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, स्क्रीनिंग के बाद की प्रक्रिया चिकित्सा जांच और विशेषज्ञ की सलाह पर निर्भर करेगी।

इसके अलावा, बीमारी की पहचान के लिए उचित परीक्षण और follow-up जरूरी रहेगा। इसलिए नई स्क्रीनिंग व्यवस्था को उपचार की पूरी प्रक्रिया के एक हिस्से के रूप में देखना चाहिए।

अब आगे क्या होगा?

बाद में, केंद्र सरकार को संशोधित प्रस्ताव भेजे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसमें उपकरण और रिएजेंट्स सहित जरूरी संसाधनों की मांग शामिल है। वहीं, Newborn Screening शुरू करने की तैयारियां भी इसी दिशा में आगे बढ़ेंगी।

एमवायएच अधीक्षक अशोक यादव के अनुसार, सेंटर में सिकल सेल से जुड़े मरीजों के लिए सुविधाएं उपलब्ध हैं। MYH sickle cell screening के तहत नई जांच सुविधा विकसित होने पर नवजात स्तर पर पहचान का दायरा बढ़ सकता है।

फिलहाल, केंद्र से वित्तीय सहायता और उपकरण उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला है। सुविधा कब शुरू होगी, इसकी आधिकारिक समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।

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