PM Modi SCO Summit: Putin से मुलाकात, Xi Jinping से भी बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वें Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में हिस्सा लिया। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र के संघर्षों के साथ वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने SCO Summit के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात की। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की।
PM Modi SCO Summit में Putin से अहम बातचीत
इसके अलावा, मोदी और पुतिन ने भारत-रूस संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने 24 अगस्त को मॉस्को में हुई India-Russia Inter-Governmental Commission की बैठक के परिणामों का भी स्वागत किया।
दोनों नेताओं ने BRICS में सहयोग और 2026 में भारत की अध्यक्षता से जुड़े विषयों पर भी विचार साझा किए। साथ ही, पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र के संघर्षों पर भी बातचीत हुई।
खास बात यह है कि इन संघर्षों का समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर असर पड़ रहा है। इसलिए भारत-रूस बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा।
PM Modi और Xi Jinping की मुलाकात ने खींचा ध्यान
इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping भी SCO Summit में आमने-सामने आए। दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत और गर्मजोशी से अभिवादन का दृश्य सामने आया।
हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में दोनों के बीच औपचारिक वन-टू-वन बैठक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। बाद की तस्वीरों और वीडियो में मोदी, Xi और Putin एक साथ नजर आए।
भारत और चीन के संबंधों के लिहाज से यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच सीमा और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दे लंबे समय से चर्चा में हैं।
SCO Summit में पश्चिम एशिया पर भी नजर
वहीं, पश्चिम एशिया का संघर्ष भी इस सम्मेलन के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में रहा। ईरान SCO का सदस्य है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव पर सदस्य देशों के रुख पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले SCO को भारत के लिए महत्वपूर्ण संगठन बताया था। उन्होंने क्षेत्र के लिए सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर को भारत की प्राथमिकताओं से जोड़ा था।
बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी द्विपक्षीय बैठक की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर चर्चा की।
SCO के 25 साल पूरे, कई मुद्दों पर चर्चा
इस वर्ष SCO की स्थापना के 25 साल पूरे हो रहे हैं। संगठन में भारत, चीन, रूस, ईरान, पाकिस्तान समेत 10 सदस्य देश हैं। इसके अलावा कई संवाद साझेदार और पर्यवेक्षक देश भी संगठन से जुड़े हैं।
SCO Summit में सुरक्षा के साथ व्यापार, ऊर्जा, परिवहन कनेक्टिविटी और डिजिटल सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सहयोग भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा।
PM Modi के लिए SCO Summit क्यों अहम?
भारत के लिए बिश्केक बैठक केवल बहुपक्षीय सम्मेलन नहीं है। यह रूस, चीन, ईरान और मध्य एशियाई देशों के साथ संवाद का महत्वपूर्ण मंच भी है।
इसके अलावा, 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS Summit होने वाला है। ऐसे में SCO Summit में हुई बातचीत का असर आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर भी देखा जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने SCO के साथ भारत की प्राथमिकताओं में Central Asia को महत्वपूर्ण स्थान दिया है। कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग के मुद्दे इस रणनीति के अहम हिस्से हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, बिश्केक में PM Modi SCO Summit के दौरान भारत की कूटनीति का फोकस कई मोर्चों पर रहा। रूस के साथ मोदी-पुतिन बातचीत में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख विषय रहे।
वहीं, Xi Jinping के साथ मोदी की मुलाकात और दोनों नेताओं की संक्षिप्त बातचीत ने भारत-चीन संबंधों को लेकर भी ध्यान खींचा।
अब नजर 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS Summit पर रहेगी। वहां भारत, रूस और चीन के नेताओं की आगे की कूटनीतिक बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है।

