Indore Banner Protest: रीगल पर दंपति का दूसरे दिन अनशन

Dainik R Times
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Indore Banner Protest: अवैध बैनर-पोस्टर के खिलाफ दंपति का दूसरे दिन भी अनशन

इंदौर। शहर में अवैध बैनर-पोस्टर हटाने की मांग को लेकर प्रहलाद पाण्डेय और संगीता पाण्डेय का सत्याग्रह जारी है। दोनों रीगल चौराहे स्थित गांधी प्रतिमा के सामने अनशन पर बैठे हैं।

Indore Banner Protest के तहत दंपति ने शहर में लगाए जा रहे अवैध बैनर, पोस्टर और स्वागत द्वार हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि नियम सभी राजनीतिक दलों और संगठनों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।

रीगल चौराहे पर दूसरे दिन भी अनशन

सबसे पहले दंपति ने शहर में अवैध प्रचार सामग्री के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रहलाद पाण्डेय ने कहा है कि जब तक अवैध बैनर हटाए नहीं जाते, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे।

वहीं, उन्होंने प्रशासन से ऐसे बैनर और पोस्टर हटाने की कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था के साथ सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन सामग्री को लेकर भी नियमों का पालन होना चाहिए।

प्रहलाद पाण्डेय ने लगाया धमकी का आरोप

इसके अलावा, प्रहलाद पाण्डेय ने एक अलग घटना को लेकर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक वे मरीमाता चौराहे पर अवैध बैनरों का वीडियो बना रहे थे।

उनका आरोप है कि इसी दौरान कुछ लोगों ने उनका मोबाइल और माइक छीन लिया। उन्होंने वीडियो डिलीट करने और धमकी देने का भी आरोप लगाया है।

यह आरोप प्रहलाद पाण्डेय की ओर से लगाए गए हैं। इस रिपोर्ट में संबंधित आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।

सभी दलों से नियम लागू करने की मांग

वहीं, पाण्डेय दंपति का कहना है कि उनका विरोध किसी एक राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। वे शहर में अवैध बैनर-पोस्टर लगाने वालों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

दंपति ने विभिन्न राजनीतिक नेताओं को पत्र भेजकर इस मामले में हस्तक्षेप की अपील करने की बात कही है। उनकी प्रमुख मांगों में अवैध बैनर-पोस्टर और स्वागत गेट हटाना शामिल है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

इसके बाद दंपति ने प्रशासन से नियमों का समान रूप से पालन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति और नियमों की जांच होनी चाहिए।

फिलहाल, इस विरोध के बीच सबसे बड़ा मुद्दा शहर में अवैध विज्ञापन सामग्री पर कार्रवाई का है। प्रशासन की ओर से इस विशेष अनशन पर आधिकारिक प्रतिक्रिया इस इनपुट में उपलब्ध नहीं है।

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