Gwalior Telecom Manufacturing Zone: बेंगलुरु में आज रोडशो

Dainik R Times
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एशिया के पहले Gwalior Telecom Manufacturing Zone (TMZ) में निवेश लाने के लिए आज बेंगलुरु में बड़ा निवेशक सम्मेलन आयोजित हो रहा है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ताज बेंगलुरु में Investors Round Table की संयुक्त अगुवाई करेंगे।

इस बैठक में देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों, टेक्नोलॉजी फर्मों और निवेशकों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। निवेशकों को ग्वालियर TMZ में उपलब्ध अवसरों, राज्य की औद्योगिक नीतियों और प्रोत्साहनों की विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

₹5,500 करोड़ के प्रस्ताव, 18,000 नौकरियों की उम्मीद

अब तक 24 कंपनियों ने ग्वालियर TMZ में कुल ₹5,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव दिए हैं। इन निवेशों से 18,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है। कंपनियों ने जमीन आवंटन के समय ही औपचारिक आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इससे पहले नई दिल्ली और मुंबई में हुए निवेशक सम्मेलनों में भी अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। 30 जुलाई को दूरसंचार विभाग और मध्यप्रदेश सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर के बाद पहले राउंड टेबल में ₹3,500 करोड़ के निवेश और 14,000 नौकरियों की प्रतिबद्धता मिली थी।

Gwalior Telecom Manufacturing Zone में क्या खास है

यह ज़ोन 170 एकड़ में विकसित हो रहा है। इसका संचालन एक स्पेशल पर्पज व्हीकल के जरिए होगा, जिसमें राज्य सरकार की 51 प्रतिशत और केंद्र सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। सिंधिया के अनुसार दो चरणों में यहां कुल ₹10,000 से ₹12,000 करोड़ का निवेश आने की उम्मीद है।

पहले चरण में HFCL ने ₹700 करोड़, VVDN ने ₹500 करोड़, Sparsh CCTV ने ₹300 करोड़, Syrma SGS ने ₹250 करोड़, Dixon Technologies ने ₹200 करोड़ और Paramount Cables ने ₹200 करोड़ के निवेश की घोषणा की है। TMZ में टेलीकॉम उपकरण निर्माण के छह प्रमुख क्षेत्रों को एक ही इकोसिस्टम में जोड़ा जाएगा।

निवेशकों को जमीन लीज, बिजली, रोजगार और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन दिए जाएंगे। पर्यावरण-अनुकूल विकास के लिए भी विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान है। दूरसंचार विभाग ने करीब ₹500 करोड़ के कॉमन टेस्टिंग लैब पैकेज का प्रस्ताव भी रखा है। बैठक में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और दूरसंचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी TMZ की खूबियां पेश करेंगे।

ग्वालियर की सबसे बड़ी ताकत इसकी कनेक्टिविटी है। करीब 120 किलोमीटर का आगरा-ग्वालियर हाई-स्पीड कॉरिडोर इसे दिल्ली और उत्तर भारत के बाजारों से जोड़ेगा। शहर का हवाईअड्डा ₹650 करोड़ की लागत से रिकॉर्ड 16 महीनों में विकसित हुआ है। हर साल यहां करीब 25,000 इंजीनियरिंग छात्र स्नातक होते हैं, जो उद्योगों को कुशल कार्यबल उपलब्ध कराएंगे।

बेंगलुरु के स्टार्टअप और रिसर्च इकोसिस्टम को देखते हुए इस रोडशो से TMZ को और गति मिलने की उम्मीद है।

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