India PMI September के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत के निजी क्षेत्र की रफ्तार सितंबर में थोड़ी नरम पड़ी है। HSBC का फ्लैश कंपोजिट PMI अगस्त के 63.2 से घटकर सितंबर में 61.9 पर आ गया। अगस्त का आंकड़ा कई सालों का उच्चतम स्तर था।
PMI में 50 से ऊपर का स्कोर विस्तार का संकेत देता है। इसलिए 61.9 का मतलब साफ है — आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी अब भी तेज है, लेकिन पिछले महीने के मुकाबले रफ्तार कुछ धीमी हुई है।
नए बिजनेस, उत्पादन और रोजगार में इजाफा पिछले महीने से हल्का रहा। अंतरराष्ट्रीय बिक्री की रफ्तार भी कमजोर पड़ी है। मैन्युफैक्चरिंग PMI में भी नरमी आई, हालांकि विस्तार की गति स्वस्थ बनी हुई है।
India PMI September: टैरिफ और घरेलू मांग की कहानी
HSBC के मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी के अनुसार, भारत पर अमेरिका की 50 फीसदी टैरिफ दर का असर निर्यात पर दिखा है। अगस्त-सितंबर के दौरान नए एक्सपोर्ट ऑर्डरों में धीमी वृद्धि दर्ज हुई।
लेकिन घरेलू मोर्चे पर तस्वीर मजबूत है। नए घरेलू ऑर्डर लगातार दूसरे महीने बढ़े हैं। भंडारी का मानना है कि इसकी एक बड़ी वजह घोषित GST दरों में कटौती है। आंकड़ों से अब तक यही पता चलता है कि ऊंचे टैरिफ का असर कम टैक्स दरों से कुछ हद तक संतुलित हो गया है।
अर्थशास्त्रियों के लिए सितंबर के आंकड़े खास अहम हैं, क्योंकि यही वह महीना है जब अमेरिकी टैरिफ और घरेलू टैक्स कटौती — दोनों ताकतें एक साथ अर्थव्यवस्था पर असर डाल रही हैं। निजी क्षेत्र की ग्रोथ में नरमी के बावजूद 61.9 का स्कोर यह दिखाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव फिलहाल मजबूत है।
(स्रोत: ANI, 23 सितंबर 2026)

