Radha Krishna Dol Indore: 132 साल पुरानी परंपरा कायम

Dainik R Times
3 Min Read
Radha Krishna Dol Indore

Radha Krishna Dol Indore: देवांग कोष्टी समाज ने निकाला डोल

इंदौर में भगवान श्री राधाकृष्ण के डोल चल समारोह की परंपरा जारी है। देवांग कोष्टी समाज परदेशीपुरा ने मंगलवार को भव्य आयोजन किया। समाज के अनुसार यह परंपरा 132 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही है।

भाद्रपद शुक्ल एकादशी यानी डोल ग्यारस पर समारोह निकाला गया। डोल परदेशीपुरा स्थित समाज की धर्मशाला क्रमांक 1/2 से रवाना हुआ।

Radha Krishna Dol Indore में दिखी झिलमिल झांकी

इस दौरान गोपियों की मटकी फोड़ने की प्रस्तुति हुई। इसके साथ ही रासलीला की मनोहारी प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा।

वहीं, झिलमिल झांकी भी समारोह का प्रमुख आकर्षण रही। भगवान श्री राधाकृष्ण की झांकी के साथ श्रद्धालु समारोह में शामिल हुए।

कलाकारों ने दिखाए हैरतअंगेज करतब

समारोह में श्री देवांग कोष्टी समाज व्यायामशाला के बालक-बालिकाओं और कलाकारों ने करतब दिखाए। कलाकारों ने बनेठी और पट्टा का प्रदर्शन किया।

इसके अलावा कलाकारों ने एक साथ दो तलवारों के साथ भी प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों ने समारोह में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

परदेशीपुरा से राजवाड़ा तक पहुंचा डोल

डोल चल समारोह परदेशीपुरा से मालवा मिल होते हुए राजवाड़ा पहुंचा। यहां कलाकारों ने अपने पारंपरिक करतबों की प्रस्तुति दी।

इसके बाद प्राचीन मां हरसिद्धि माता मंदिर में डोल पहुंचा। यहां आरती के साथ चल समारोह का समापन हुआ।


नई पीढ़ी तक पहुंचाई जा रही परंपरा

समाज के प्रचार मंत्री और मीडिया प्रभारी दिलीप वर्मा ने बताया कि यह परंपरा 132 वर्षों से अधिक समय से निभाई जा रही है।

उनके अनुसार, आयोजन का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना है। साथ ही समाज की पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जाता है।

समाज के पदाधिकारियों का रहा सहयोग

आयोजन में समाज अध्यक्ष कल्याण देवांग, उपाध्यक्ष मनोहर टेमरे और कोषाध्यक्ष कैलाश कनौड़िया शामिल रहे। सचिव एवं झांकी कलाकार डॉ. सुरेश बुर्रा और संगठन मंत्री नरेंद्र भुरड़ ने भी सहयोग किया।

इसके अलावा जीतू निमजे, मयंक कनौड़िया, दिपेश वर्मा, ओमप्रकाश कनौड़िया और सत्यनारायण देवांग का सहयोग रहा। डोल और झांकी की विद्युत सज्जा श्याम इलेक्ट्रिक के संचालक श्याम बुर्रा, आशीष बुर्रा और लोकेश बुर्रा ने की।

Share This Article