बिजली मंत्रालय थर्मल पावर प्लांट्स को घरेलू कोयले के साथ 5 प्रतिशत तक आयातित कोयला मिलाने (blending) का निर्देश देने पर विचार कर रहा है। तीन सरकारी सूत्रों के हवाले से रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के बाद यह पहली बार होगा जब अनिवार्य blending पर विचार हो रहा है।
क्यों पड़ी आयातित कोयले की जरूरत
पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक तेजी से घट रहा है। सितंबर तक तीन महीनों में स्टॉक करीब 49 प्रतिशत गिर गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में गिरावट 26 प्रतिशत थी। सितंबर में बिजली की मांग गर्मियों जैसी बनी रही, जो पिछले वर्षों के पैटर्न से अलग है।
इस वजह से मासिक spot power prices 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। सूत्रों का कहना है कि चर्चा अभी शुरुआती चरण में है और इसका मकसद घरेलू कोयले को अगली गर्मियों के लिए बचाकर रखना है।
महंगा पड़ेगा आयात, नीति में बड़ा उलटाव
हालांकि आयातित कोयला महंगा पड़ने वाला है। इंडोनेशियाई कोयले की कीमतें मई से करीब 20 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं, जबकि रूसी कोयला 14 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीकी कोयला 19 प्रतिशत महंगा हुआ है। इसके बावजूद भारत का कोयला आयात पहले से 15 महीने के उच्चतम स्तर पर है। ज्यादातर भारतीय प्लांट घरेलू कोयले पर चलते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से 15 प्रतिशत तक आयातित कोयला मिलाया जा सकता है।
गौरतलब है कि दिसंबर 2021 से मार्च 2024 तक blending के निर्देश लागू थे, जिन्हें बाद में खत्म कर दिया गया था। यह कदम घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात घटाने की मुहिम का उलटाव माना जा रहा है। अगस्त 2026 में राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, blending के लिए कोयला आयात 2023-24 के 23.9 मिलियन टन से घटकर 2025-26 में 6.8 मिलियन टन रह गया था — यानी 71.5 प्रतिशत की गिरावट। बिजली और कोयला मंत्रालय ने इस पर टिप्पणी नहीं की है।

