डेनमार्क की सैन्य खुफिया एजेंसी ने चेतावनी दी है कि रूस आने वाले महीनों में पश्चिमी देशों के खिलाफ अपना हाइब्रिड युद्ध तेज कर सकता है। आकलन में कहा गया है कि NATO के रूस से सटे किसी सदस्य देश पर सीमित सैन्य हमले का खतरा कम लेकिन बढ़ता जा रहा है।
डेनिश डिफेंस इंटेलिजेंस सर्विस (FE) ने गुरुवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि मास्को बिना निशान वाले सैनिक तैनात कर सकता है या यूक्रेन का समर्थन करने वाले बुनियादी ढांचे पर लंबी दूरी के हथियारों से हमला कर सकता है।
गठबंधन को तोड़ने की कोशिश
FE प्रमुख थॉमस अहरेनकील ने कहा कि रूस अपने सैनिकों की तैनाती के लिए अन्य देशों में रूसी अल्पसंख्यकों की रक्षा का बहाना बना सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि मास्को फॉल्स-फ्लैग ऑपरेशन के तहत यूक्रेन निर्मित ड्रोन से हमला करवाकर उसे कीव की हरकत बता सकता है।
अहरेनकील ने कहा, “मकसद उस देश पर कब्जा नहीं, बल्कि NATO को बांटना होगा।” एजेंसी का मानना है कि अगर रूस को लगे कि सहयोगी देश जवाब पर एकजुट नहीं हो पाएंगे, तो वह छोटा हमला आजमा सकता है।
NATO ने बढ़ाई खुफिया साझेदारी
यूरोप के NATO कमांडर जनरल एलेक्सस ग्रिंकेविच ने कहा कि गठबंधन तोड़फोड़ की घटनाओं के जवाब में खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान बढ़ा रहा है। उन्होंने हाल की घटनाओं का हवाला दिया, जिनमें जर्मनी के लाइपजिग/हाले हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले की कोशिश और एक रूसी जहाज द्वारा डेनिश सैन्य हेलीकॉप्टर की ओर फ्लेयर्स दागना शामिल है।
हालांकि जनरल ने कहा कि सहयोगियों को “शांत और आश्वस्त” रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमित हमला “असंभावित है, लेकिन इसे खारिज नहीं किया जा सकता” और NATO के पास हर स्थिति का जवाब देने की क्षमता है।
रूस का खंडन
रूस ने हाइब्रिड युद्ध या तोड़फोड़ में शामिल होने के आरोपों को बार-बार नकारा है। डेनमार्क में रूसी दूतावास ने मूल्यांकन को खारिज करते हुए कहा कि यह विश्वसनीय सबूतों पर आधारित नहीं है और यूक्रेन पर तनाव बढ़ाने के लिए डेनमार्क अगुवाई कर रहा है।
एजेंसी ने यह भी साफ किया कि NATO क्षेत्र पर पूर्ण आक्रमण के कोई संकेत नहीं हैं और ऐसा होना बेहद असंभावित माना जा रहा है। हाल के महीनों में यूरोप में तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद EU सदस्य देश रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं।
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