केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बाजार से कम उधारी लेने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी उधारी कैलेंडर में कहा कि अक्टूबर से मार्च के बीच सरकार 7.86 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचेगी। यह राशि पहले की योजना से थोड़ी कम है। इस फैसले के बाद रुपया-डॉलर बाजार पर भी नजर बनी रहेगी।
पूरे वित्त वर्ष का सकल उधारी लक्ष्य अब 15.995 लाख करोड़ रुपये (लगभग 16 लाख करोड़) होगा, जो पहले घोषित 16.09 लाख करोड़ और बजट में बताए गए 17.20 लाख करोड़ रुपये से कम है। सरकार का मकसद बढ़ती यील्ड पर लगाम लगाना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना है।
23 साप्ताहिक नीलामी
उधारी कैलेंडर आरबीआई की सलाह से तैयार किया गया है और 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगा। इस दौरान 23 साप्ताहिक नीलामियां होंगी, जिनका आकार ज्यादातर 33,000 से 36,000 करोड़ रुपये के बीच रहेगा।
तीन साल से लेकर 50 साल तक की परिपक्वता वाली प्रतिभूतियां बेची जाएंगी। 10 साल का बॉन्ड सबसे बड़ा हिस्सा रहेगा, हालांकि उसकी हिस्सेदारी घटा दी गई है। सरकार दूसरी छमाही में 15,000 करोड़ रुपये के ग्रीन बॉन्ड भी बेचेगी, जिनकी पिछली छमाही में अच्छी मांग देखी गई थी।
लंबी अवधि पर ज्यादा जोर
नए कैलेंडर में लंबी अवधि की प्रतिभूतियों का हिस्सा बढ़ाया गया है। 15 साल और 30 साल की परिपक्वता का हिस्सा 26.8 प्रतिशत होगा, जो अप्रैल–सितंबर में 21.8 प्रतिशत था। वहीं 5 साल और 10 साल के बॉन्ड की हिस्सेदारी घटकर क्रमशः 12.1 और 26.3 प्रतिशत कर दी गई है।
डीलरों का कहना है कि तरल 5 साल और 10 साल के खंड में अगले हफ्ते कुछ खरीदारी लौट सकती है। करूर वैश्य बैंक के ट्रेजरी प्रमुख वीआरसी रेड्डी ने कहा कि उधारी की मात्रा कोई बड़ा बदलाव नहीं है, लेकिन रचना में बदलाव से तरल खंडों में राहत की उम्मीद है।
पहली छमाही का हिसाब
अप्रैल–सितंबर के बीच सरकार ने 8.135 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे। 11 सितंबर की नीलामी में 6,500 करोड़ रुपये का हिस्सा अनबिका रह गया था, जिसे नई योजना में समायोजित किया गया है। छोटे निवेशकों के लिए हर नीलामी में 5 प्रतिशत हिस्सा गैर-प्रतिस्पर्धी बोली के लिए सुरक्षित रहेगा। जरूरत के मुताबिक कैलेंडर में बदलाव का अधिकार सरकार ने अपने पास रखा है।

