दिल्ली की 135 साल पुरानी Central Secretariat Library के भविष्य पर आज Supreme Court में अहम सुनवाई होगी। Supreme Court ने इस मामले में स्वत: संज्ञान (suo motu) लिया है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। इस लाइब्रेरी में 8.5 लाख से ज्यादा किताबें रखी हैं।
यह लाइब्रेरी शास्त्री भवन में चार मंजिलों पर फैली हुई है। इसका कुल क्षेत्रफल करीब 5,500 वर्ग मीटर है। 1969 से यह लाइब्रेरी यहीं स्थित है। Central Vista पुनर्विकास योजना के तहत शास्त्री भवन को तोड़े जाने की योजना है। CPWD ने 17 सितंबर को 30 सितंबर तक भवन खाली करने का आदेश दिया था।
विवाद की जड़ क्या है?
29 सितंबर को एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नई Central Vista योजना में लाइब्रेरी के लिए कोई जगह नहीं रखी गई है। इसके बाद 3 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान का मामला दर्ज किया। मामले का शीर्षक है — “In Re: 135-Yr-Old Library 8.5 Lakh Books – And No Room In The New Central Vista Plan”।
हालांकि आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने इन दावों को खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि कर्तव्य पथ पुनर्विकास योजना में लाइब्रेरी के लिए जगह तय की गई है। नई इमारत के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि कर्तव्य भवन-2 में सिर्फ दो कमरे (करीब 300 वर्ग मीटर) दिए गए थे।
किताबों की सुरक्षा पर चिंता
लाइब्रेरी में दुर्लभ पुस्तकें, सरकारी रिकॉर्ड और गजट रखे हैं। सरकारी अधिकारी और प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्र नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करते हैं। इतने बड़े संग्रह को सुरक्षित स्थानांतरित करना बड़ी चुनौती है। किताबों को नमी, धूल और टूट-फूट से बचाना भी जरूरी है। आज की सुनवाई में किताबों की सुरक्षा और वैकल्पिक जगह पर कोर्ट का रुख साफ होगा।
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