OPEC+ ने नवंबर के लिए कच्चे तेल के उत्पादन लक्ष्य को स्थिर रखने का फैसला किया है। संगठन के सात मुख्य सदस्यों ने रविवार को ऑनलाइन हुई संक्षिप्त बैठक में यह निर्णय लिया। फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप ही रहा और विशेषज्ञों का मानना है कि अगले साल तक उत्पादन नीति में कोई बड़ा बदलाव संभव नहीं है।
जिन सात देशों ने यह फैसला लिया उनमें सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाखस्तान और ओमान शामिल हैं। ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण खाड़ी देशों का निर्यात बुरी तरह प्रभावित है — उत्पादक देश अपने लक्ष्यों से काफी कम उत्पादन कर रहे हैं और निर्यात सामान्य स्तर का सिर्फ 60 से 80 प्रतिशत तक रह गया है।
OPEC+ oil output फैसला और Brent की ऊंचाई
बाजार की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों पर है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जबकि ईरान युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी में यह करीब 73 डॉलर था। UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टाउनोवो के अनुसार बाजार अभी भी तंग बना हुआ है। शुक्रवार को यूरोपीय देशों ने अमेरिका के अनुरोध पर डीजल रिजर्व जारी करने पर सहमति दी थी, जिससे कीमतों में कुछ नरमी आई थी।
OPEC+ ने 2026 के दौरान उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने की घोषणाएं कीं, लेकिन मध्य-पूर्व संघर्ष के कारण ज्यादातर बढ़ोतरी कागजों तक ही सीमित रही। युद्ध ने सदस्यों की उत्पादन क्षमता की समीक्षा को भी टाल दिया है, जिससे 2027 के कोटे का फैसला प्रभावित होगा। अगस्त में सात सदस्यों ने कुल 25 मिलियन बैरल प्रतिदिन का उत्पादन किया, जो युद्ध-पूर्व फरवरी से करीब 5 मिलियन बैरल कम है। समूह की अगली बैठक 1 नवंबर को होगी।
भारत जैसे आयातक देशों के लिए यह खबर सीधी अहमियत रखती है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इससे पहले देश में नायरा एनर्जी ने पेट्रोल पर 5 रुपये और डीजल पर 3 रुपये की बढ़ोतरी की थी।
