मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना से जुड़े मरीजों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने नियमों का पालन नहीं करने वाले 65 अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया है। इनमें इंदौर के 17 अस्पताल भी शामिल हैं। अब इन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड पर मुफ्त इलाज नहीं मिलेगा।
8 अक्टूबर को कमेटी का फैसला
दीनदयाल स्वास्थ्य सुरक्षा परिषद की राज्य इम्पैनलमेंट कमेटी ने 8 अक्टूबर को बैठक में यह निर्णय लिया। जांच में पाया गया कि 60 अस्पतालों के पास NABH (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स) की अनिवार्य मान्यता नहीं थी। कुछ की मान्यता एक्सपायर हो चुकी थी, तो कुछ ने कभी मान्यता ली ही नहीं थी।
इसके अलावा 5 अस्पतालों को इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने पिछले छह महीनों में एक भी आयुष्मान लाभार्थी का इलाज नहीं किया था। इनमें भोपाल का शल्या जॉइंट केयर, ग्वालियर का मेट्रो न्यूरो, नीमच का रामनिवास आयरन, शाजापुर का श्री डीपी केयर और टीकमगढ़ का न्यू सिटी अस्पताल शामिल हैं।
इंदौर के 17 अस्पताल सूची से बाहर
इंदौर में कुल 91 अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े थे। अब 17 के हटने के बाद शहर में 74 अस्पतालों में ही योजना का लाभ मिलेगा। हटाए गए अस्पतालों में चोइथराम नेत्रालय, पाथ हॉस्पिटल, लक्ष्मी मेमोरियल, दृश्य अस्पताल, मेकरेटिना, गुरुजी सेवा न्यास, बांठिया, एमएम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, वर्मा यूनियन, खंडेलवाल, मोहक हाईटेक स्पेशियलिटी, गीता भवन, सेवाकुंज, मेडिस्टा, आर्थोस क्लिनिक और मेवाड़ा अस्पताल शामिल हैं।
जबलपुर के भी करीब 7 निजी अस्पतालों पर गाज गिरी है, जिनमें नेशनल, पीजी मल्टी स्पेशियलिटी और सिटी हॉस्पिटल जैसे नाम हैं। भोपाल में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद CEO अरविंद शाह ने यह सख्त फैसला लिया। विभाग ने 1 अक्टूबर से NABH एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया था।
मरीजों पर क्या असर पड़ेगा
प्रदेश में 1,953 अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं, जिनमें 813 निजी हैं। अब मरीजों को इलाज से पहले अस्पताल की सूची जांचनी होगी। गौरतलब है कि 8 अक्टूबर से ही निजी अस्पतालों का बहिष्कार भी चल रहा है, जिससे मरीज पहले से परेशान हैं।
यह भी पढ़ें: Ayushman Boycott: आज से MP में इलाज बंद, बहिष्कार शुरू and Indore Central Jail में डेंगू: 50+ कैदी बीमार, 3 पॉजिटिव
