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SC Contempt Case: Delhi Police Commissioner की बिना शर्त माफी

Dainik R Times
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सुप्रीम कोर्ट के अवमानना नोटिस के जवाब में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने गुरुवार को शीर्ष अदालत से बिना शर्त और अयोग्य माफी मांगी। दोनों अधिकारियों ने अलग-अलग हलफनामा दाखिल कर अपने कदमों का बचाव भी किया। यह मामला 10 अक्टूबर को Cockroach Janta Party (CJP) के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़ा है।

अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की अवमानना याचिका में आरोप है कि अदालत के 9 अक्टूबर के आदेश का उल्लंघन करते हुए GTB Nagar और Vishwavidyalaya मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद कर दिए गए, इंटरनेट सेवाएं ठप की गईं और लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस आयुक्त ने हलफनामे में कहा कि अदालत के निर्देशों का “कोई उल्लंघन नहीं हुआ, जानबूझकर तो बिल्कुल नहीं”। उनका दावा है कि उठाए गए कदम खुफिया सूचनाओं और जमीनी हालात के आकलन पर आधारित थे और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी थे।

प्रतिबंधों पर पुलिस और गृह मंत्रालय का तर्क

हलफनामे के मुताबिक, मेट्रो के 57 स्टेशनों पर प्रतिबंध का प्रस्ताव था, लेकिन अंत में 303 में से केवल 45 स्टेशनों (करीब 15 प्रतिशत नेटवर्क) पर ही रोक लगाई गई। 10 अक्टूबर रात 10 बजे से मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बहाल कर दी गईं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इंटरनेट की पाबंदी सिर्फ सेलुलर डेटा पर थी, वाई-फाई और ब्रॉडबैंड पर नहीं, और यह Raisina Hill के चार किलोमीटर दायरे में रात 10 बजे तक के लिए लगाई गई थी।

हिरासत के आरोपों पर पुलिस का कहना है कि लोगों को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 और BNSS की धारा 172 के तहत हटाया गया और दो से छह घंटे तक अस्थायी केंद्रों पर रखा गया, थानों या जेलों में नहीं। राजनीतिक नेताओं को SHO के चेंबर में चाय-भोजन की व्यवस्था के साथ रखा गया। गृह सचिव ने कहा कि पुलिस के अनुरोध पर इंटरनेट निलंबन कानून के अनुसार उचित पाया गया और अदालत से 11 अक्टूबर के आदेश में संशोधन की प्रार्थना की, ताकि जरूरत पड़ने पर कानून के तहत इंटरनेट बंद किया जा सके।

सॉलिसिटर जनरल का रुख और पृष्ठभूमि

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जब अवमानना नोटिस जारी होता है, तो कानून के मुताबिक कथित अवमाननाकर्ता को माफी मांगनी होती है। उन्होंने मीडिया रिपोर्टों पर भी निशाना साधा, जिनमें “बिना संदर्भ” सरकार की माफी की खबरें चलाई गईं। उल्लेखनीय है कि 11 अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने गृह सचिव, पुलिस आयुक्त और DMRC अध्यक्ष को अवमानना नोटिस जारी किए थे। पुलिस ने अपने बचाव में यह भी कहा कि 10 अक्टूबर के आह्वान से पहले 6, 7 और 8 अक्टूबर की घटनाओं और करीब 240 घायल कर्मियों की पृष्ठभूमि में एहतियाती कदम उठाने पड़े। अदालत अब इन हलफनामों पर विचार करेगी और तय करेगी कि नोटिस रद्द किया जाए या आगे कार्यवाही हो।

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