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MP में 100 मंजिला इमारतें: Indore Conclave में बड़ा फैसला

Dainik R Times
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मध्य प्रदेश में अब 100 मंजिला तक ऊंची इमारतें बनने का रास्ता खुल सकता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर में कहा कि सरकार भवन निर्माण के नियमों में बदलाव कर रही है। इसके तहत पर्याप्त चौड़ी सड़क वाली जगहों पर MP 100 मंजिला इमारतें बनाने का प्रावधान किया जा रहा है।

अभी तक शहरों में आमतौर पर 30 मीटर से ऊंची इमारतों पर रोक जैसी स्थिति थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था में निर्धारित मानकों के साथ ऊंची इमारतों की अनुमति मिलेगी। उनका कहना था कि इससे खेती की जमीन पर दबाव कम होगा और शहरों में जमीन का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।

यह घोषणा इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित Urban Growth Conclave 2.0 में हुई। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर शहरों को निवेश और रोजगार का बड़ा केंद्र बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार शहरों में किफायती आवास दे रही है और नियोजित विकास पर काम कर रही है।

MP 100 मंजिला इमारतें: सड़क की चौड़ाई होगी शर्त

मुख्यमंत्री के बयान के अनुसार, 100 मंजिला इमारत की अनुमति हर जगह नहीं मिलेगी। इसके लिए सड़क की पर्याप्त चौड़ाई और तय मानक पूरे करने होंगे। सुरक्षा से जुड़े नियम भी लागू रहेंगे। हालांकि, विस्तृत दिशा-निर्देश अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। इसलिए यह प्रस्ताव अभी मसौदा नियमों के चरण में है, अंतिम नियम अलग से जारी होंगे।

सरकार का तर्क है कि ऊंची इमारतों से एक ही जमीन पर ज्यादा आवास और दफ्तर बन सकेंगे। इससे शहर फैलने के बजाय ऊपर की ओर बढ़ेंगे। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बदलावों के साथ अग्नि सुरक्षा, पानी, बिजली और यातायात की व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए।

इंदौर और भोपाल के आसपास मेट्रो क्षेत्र

सम्मेलन में भोपाल और इंदौर के आसपास छह-छह जिलों वाले महानगर क्षेत्रों की योजना भी सामने आई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर-भोपाल-जबलपुर औद्योगिक गलियारे से करीब एक लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है। इसके अलावा, इंदौर आर्थिक क्षेत्र 2047 की मास्टर प्लान भी जारी की गई। यह योजना नीति आयोग की पहल के तहत तैयार हुई है।

इस मौके पर तीन मसौदा नीतियां भी सामने रखी गईं। इनमें किफायती आवास, उपचारित गंदे पानी के दोबारा इस्तेमाल और एकीकृत भूमि विकास व भवन नियम शामिल हैं। साथ ही, शहरी वित्त और निवेश से जुड़े छह समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर हुए। इनमें इंदौर नगर निगम, उज्जैन विकास प्राधिकरण और रीवा नगर निगम से जुड़े बैंक समझौते शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने ग्रामीण संपत्तियों से जुड़ी एक योजना का भी जिक्र किया। इसके तहत करीब 50 लाख निजी ग्रामीण संपत्तियों का मुफ्त पंजीकरण किया जाएगा। उनका कहना था कि पंजीकरण के बाद ग्रामीण अपनी संपत्ति पर बैंक से ऋण ले सकेंगे। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधि बढ़ेगी।

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