भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार रात बड़ी सफलता हासिल की। GSLV-F18 रॉकेट ने NVS-03 नेविगेशन उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। उड़ान रात 11:51 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भरी गई। यह GSLV रॉकेट की 20वीं उड़ान थी। ISRO NVS-03 मिशन से भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली NavIC को नई ताकत मिलेगी।
NavIC के लिए क्यों अहम है यह लॉन्च
NavIC भारत की अपनी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है। पहले इसका नाम IRNSS था। यह प्रणाली भारत और आसपास के करीब 1,500 किलोमीटर क्षेत्र में स्थान और समय की सटीक जानकारी देती है। इसलिए यह GPS जैसी विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करती है।
जुलाई 2026 में संसद को बताया गया था कि सिर्फ तीन उपग्रह ही सेवा दे रहे थे। ये उपग्रह स्थिति, नेविगेशन और समय की सेवा देते हैं। ये उपग्रह IRNSS-1B, IRNSS-1I और NVS-01 हैं। अकेले स्थिति बताने के लिए कम से कम चार उपग्रह चाहिए। इसलिए NavIC अकेले पूरी सेवा नहीं दे पा रहा था। NVS-03 चौथा उपग्रह बनकर इस कमी को पूरा करेगा।
NVS-02 की नाकामी से क्या सबक लिया गया
जनवरी 2025 में NVS-02 लॉन्च हुआ था। वह अपनी तय कक्षा तक नहीं पहुंच सका था। जांच में पता चला कि उसके इंजन तक ईंधन पहुंचाने वाला पायरो वाल्व नहीं खुला था। इसलिए उपग्रह कक्षा बदलने का काम नहीं कर सका।
इस बार ISRO ने बड़ा बदलाव किया। NVS-03 के पायरो वाल्व लॉन्च से पहले ही खोल दिए गए थे। यह तरीका पहली बार अपनाया गया। इसके अलावा सुधारों की जांच CMS-03 उपग्रह पर भी की गई थी। इसलिए इस मिशन पर खास नजर थी।
NVS-03 उपग्रह में क्या खास है
NVS-03 दूसरी पीढ़ी की NVS श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। इसका वजन करीब 2,232 किलोग्राम है। इसमें भारत में बना रूबिडियम परमाणु घड़ी लगी है। इसके साथ खरीदी गई घड़ियां भी हैं।
यह उपग्रह L5 और S बैंड के साथ नया L1 सिग्नल भी भेजेगा। इससे ज्यादा मोबाइल और उपकरण NavIC से जुड़ सकेंगे। रॉकेट करीब 19 मिनट की उड़ान के बाद इसे भू-स्थिर स्थानांतरण कक्षा में पहुंचाएगा। इसके बाद उपग्रह अपने इंजन से अंतिम कक्षा तक जाएगा।
GSLV-F18 करीब 50 मीटर ऊंचा तीन चरण वाला रॉकेट है। उड़ान के समय इसका वजन करीब 420 टन था। लक्ष्य कक्षा का निकटतम बिंदु 170 किलोमीटर और दूरतम बिंदु 37,023 किलोमीटर है।
आगे क्या होगा
उपग्रह को अंतिम कक्षा तक पहुंचने में कई दिन लगेंगे। इसके बाद इसकी जांच होगी। फिर यह NavIC तंत्र का हिस्सा बनकर सेवा देने लगेगा। ISRO आगे NVS-04 और NVS-05 उपग्रह भी तैयार कर रहा है।
NavIC का इस्तेमाल रेलवे, मछुआरों, परिवहन और आपदा प्रबंधन में होता है। मोबाइल फोन में भी इसकी सेवा काम आती है। इसलिए यह लॉन्च आम लोगों के लिए भी अहम है। भारत की अपनी नेविगेशन क्षमता अब मजबूत होगी।
